उद्धव ठाकरे ने आगे कहा, चुनाव आयोग 'चूना लगाव' आयोग है और सत्ता में बैठे लोगों का गुलाम है। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने जिस सिद्धांत के आधार पर यह फैसला लिया, वह गलत है।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न उनसे छीनकर एक बागी गुट(शिंदे गुट) को आंवटित कर दिया है, लेकिन वह उनसे उनकी पार्टी को कभी छीन नहीं सकता है।
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दरअसल, शिवसेना को लेकर चुनाव आयोग के फैसले के बाद पहली बार उद्धव ठाकरे किसी रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, उनके पास अपने समर्थकों को देने के लिए कुछ नहीं है। मैं आपका आशीर्वाद और समर्थन लेने आया हूं। उन्होंने आगे कहा, अगर चुनाव आयोग मोतियाबिंद से पीड़ित नहीं है तो उसे आना चाहिए और जमीनी हकीकत देखनी चाहिए।
ठाकरे ने आगे कहा, चुनाव आयोग 'चूना लगाव' आयोग है और सत्ता में बैठे लोगों का गुलाम है। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग ने जिस सिद्धांत के आधार पर यह फैसला लिया, वह गलत है। उन्होंने कहा, मैंने चुनाव आयोग के फैसले को स्वीकार नहीं किया है और उच्चतम न्यायालय में अपील की है। उन्होंने कहा कि भाजपा शिवसेना को क्रूरता से खत्म करने की कोशिश कर रही है।
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मोदी के नाम पर वोट मांगें न कि शिवसेना के नाम पर
उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया, उन्होंने सरदार पटेल का नाम चुराया। इसी तरह, उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को चुरा लिया और बाला साहेब ठाकरे के साथ ऐसा ही किया। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे मोदी के नाम पर वोट मांगें न कि शिवसेना के नाम पर और बिना बाला साहेब ठाकरे की फोटो पर।
वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने इस बैठक में कुछ भी नया नहीं कहा। वही शब्द, वही वाक्य, वही नाटक लेकिन सच तो यह है कि 40 विधायकों ने उनका साथ छोड़ दिया। इसलिए उनके भाषण में गुस्से और हताशा के अलावा कुछ नहीं था।