महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सोमवार को उम्मीदवारों की नाम वापसी के बाद मुकाबलों की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। रोचक मुकबलों में पहला मामला महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का सामने आ रहा है, जिन्हें पार्टी ने पुणे की कोथरुड विधानसभा से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
पाटिल के नाम की घोषणा के साथ ही उन्हें बाहरी बताते हुए विरोध होने लगा था। कई जगहों पर इसके बैनर भी लग गए थे। मगर पाटिल ने लोगों को याद दिलाया कि वे पुणे के जमाई हैं। इस पर तर्क दिया गया कि उनका जमाई राजा वाला सत्कार करके वापस भेजा जाएगा। घर में जगह नहीं दी जाएगी।
राज ठाकरे की मनसे से मराठा किशोर शिंदे उम्मीदवार
इससे भाजपा में हलचल मची थी। मगर पार्टी को सोमवार को तब राहत मिली जब स्थानीय ब्राह्मण महासभा ने पाटिल के पक्ष में खड़े रहने की घोषणा कर दी। इसके बाद कोथरुड सीट पर लड़ाई ब्राह्मण बनाम मराठा हो गई है। पाटिल के विरुद्ध यहां राज ठाकरे की मनसे ने मराठा किशोर शिंदे को उम्मीदवार बनाया है।
मनसे के पक्ष में एनसीपी ने अपने खाते में आई इस सीट पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। उधर, यहां प्रभाव के बावजूद शिवसैनिक यह सीट भाजपा के खाते में जाने से नाराज हैं और उद्धव ठाकरे से कह चुके हैं कि वे इस बार मनसे को समर्थन देंगे। उद्धव के लिए इन लोगों को मनाना कठिन चुनौती है।
पाटिल की इन संगठनों से बातचीत के बाद निकली राह
उधर, खुद को पुणेकर बताने के लिए मुंबईकर पाटिल ने पुणे में एक मकान किराये पर ले लिया। साल 2014 में कोथरुड से भाजपा की मेधा कुलकर्णी विधायक बनी थीं। भाजपा ने इस बार उनका टिकट काटा। इससे ब्राह्मण नाराज थे। मगर बीते तीन दिनों में पाटिल की इन संगठनों से बातचीत के बाद राह निकल आई है।
सभी ब्राह्मण संगठनों ने मनसे के एनसीपी-कांग्रेस समर्थित मराठा उम्मीदवार शिंदे के विरुद्ध अपना समर्थन पाटिल को देने का निर्णय लिया है। पाटिल ने माना कि मेधा कुलकर्णी के साथ टिकट बंटवारे में अन्याय हुआ है, लेकिन जीत के बाद उन्हें अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने ब्राह्मण महासभा से वादा किया कि उनकी हर समस्या को दूर किया जाएगा।
पाटिल ने कहा, मैंने उनसे कहा है कि लिखित में शिकायतें और समस्याएं दें, मैं खुद उन्हें देखूंगा। साल 2009 में बनी कोथरुड सीट पर सबसे पहले शिवसेना ने कब्जा किया था लेकिन, साल 2014 में यहां मेधा कुलकर्णी ने शिवसेना उम्मीदवार को 60 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। तब मनसे के किशोर शिंदे चौथे स्थान पर रहे थे।