राजग के मुख्य घटक दल होने के बावजूद भाजपा और शिवसेना विधानसभा चुनाव के लिए 2014 की राह पर चलते दिखाई दे रहे हैं, जब दोनों ने लोकसभा चुनाव में एकसाथ उतरने के बाद विधानसभा चुनाव में अलग-अलग लड़ा था।
तब राज्य की 288 सीटों में से 185 पर इन दोनों दलों ने कब्जा किया था। 2014 में भाजपा को 122 और शिवसेना को 63 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन यह माना गया था कि इन दोनों दलों के गठबंधन में उतरने पर यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता था। इस बार भी दोनों दलों में यही तनातनी चल रही है।
भाजपा जहां शिवसेना को अधिकतम 120 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का प्रस्ताव दे रही है। वहीं शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बराबर बंटवारे और 2.5-2.5 साल के लिए दोनों पार्टियों को अपना-अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिलने की शर्त पर अड़े हुए हैं। हालांकि इससे पहले शिवसेना के एक शीर्ष नेता ने अपनी पार्टी के 135 सीटों पर तैयार हो जाने की बात भी कही थी।