raid at advocate Satish Ukes house
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को नागपुर के वकील सतीश उके और उनके भाई प्रदीप को मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्हें शुक्रवार को कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है। इससे पहले नागपुर में ईडी ने एक वकील के आवास पर छापेमारी की थी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस वकील ने वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ बीते कुछ वर्षों में कई याचिकाएं दायर की थीं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम नागपुर के वकील सतीश उके के पार्वती नगर इलाके में स्थित मकान पर सुबह छह बजे पहुंची। टीम केंद्रीय रिजर्व पुलिस (CRPF) के जवानों के साथ कड़ी सुरक्षा में पहुंची। पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की मुंबई इकाई कुछ जमीनों के लेन-देन को लेकर यह कार्रवाई कर रही है।
उके ने भाजपा नेताओं खासकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस के खिलाफ अदालतों में कई याचिकाएं दायर की हैं। एक याचिका में उके ने फडणवीस पर आरोप लगाया था कि चुनावी हलफनामे में उन्होंने आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की जाए। उके ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेता ने 2014 में उनके खिलाफ 1996 और 1998 में दर्ज दो आपराधिक मामलों धोखाधड़ी और जालसाजी को छुपाकर झूठा हलफनामा दायर किया।
वकील उके ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सीबीआई जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत को लेकर भी याचिका लगाई थी। जज लोया सोहराबुद्दीन शेख के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। उनकी 2014 में नागपुर में हृदयघात से मौत हो गई थी।
उके महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता नाना पटोले के भी वकील हैं। पटोले ने महाराष्ट्र की पूर्व खुफिया प्रमुख व आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला के खिलाफ कथित फोन टैपिंग मामले में 500 करोड़ रुपये की मानहानि का केस दायर किया है।
एजेंसियों का इस्तेमाल भाजपा विरोधी आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा: पटोले
वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि भाजपा व केंद्र के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचलने के लिए ईडी एवं अन्य जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट व बॉम्बे हाई कोर्ट को इन सरकारी निकायों के बढ़ते दुरूपयोग को रोकने के लिए दखल देना चाहिए। पटोले ने केंद्र द्वारा जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की अघोषित आपातकाल से तुलना की।