महाराष्ट्र में बारिश की कमी के बीच राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकाओं को सूखा प्रभावित घोषित किया है। सरकार ने किसानों के लिए फसल ऋण के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत और बिजली बिल में राहत समेत कई कदमों का एलान किया है। इसी दौरान कांग्रेस ने राज्य में तेजी से बढ़ाए जा रहे डेटा सेंटर उद्योग पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने पूछा है कि जब राज्य का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा सूखे की चपेट में है, तब बड़े डेटा सेंटरों के लिए पानी की जरूरत कैसे पूरी की जाएगी और किसानों व आम लोगों के पानी के अधिकारों की रक्षा कैसे होगी।
महाराष्ट्र सरकार के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, 358 में से 265 तालुका सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं। यह राज्य के करीब 74 प्रतिशत तालुकाओं को कवर करता है। ये तालुके 32 जिलों में फैले हैं। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 74 सूखा प्रभावित तालुके हैं, जो सभी संभागों में सबसे ज्यादा हैं। सरकार ने सूखे की स्थिति के बाद किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को फसल नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार की डेटा सेंटर नीति पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया है, जबकि महाराष्ट्र डेटा सेंटर उद्योग का तेजी से विस्तार कर रहा है। खेड़ा के मुताबिक, राज्य को डेटा सेंटर क्षेत्र में 300 अरब डॉलर से अधिक के निवेश में रुचि मिली है और सरकार 2032 तक 5.7 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य रख रही है। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े विस्तार के लिए जरूरी संसाधनों का प्रबंधन कैसे किया जाएगा।
कांग्रेस ने कहा है कि डेटा सेंटर चलाने के लिए दो महत्वपूर्ण संसाधनों की जरूरत होती है, बिजली और पानी। पानी की खपत इस्तेमाल की जाने वाली कूलिंग तकनीक पर निर्भर करती है। ऐसे में पानी की कमी वाले महाराष्ट्र जैसे राज्य में डेटा सेंटरों की पानी की जरूरत एक अहम मुद्दा बन जाती है। खेड़ा के अनुसार, सरकार ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है जिसमें नगर निकाय सीवेज का उपचार करेंगे, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम यानी एमआईडीसी उसे और साफ करेगा और इसके बाद तैयार पानी डेटा सेंटर तथा दूसरे उद्योगों को बेचा जाएगा।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब राज्य के करीब तीन-चौथाई हिस्से में आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित हो चुका है, तब सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार के लिए किसानों और आम नागरिकों के पानी के संसाधनों का इस्तेमाल न हो। खेड़ा ने यह भी सवाल किया कि महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की दर ऊंची होने के बीच पानी पर पहला अधिकार किसका होना चाहिए, किसानों का या डेटा सेंटरों का। कांग्रेस ने यह भी पूछा कि अगर उद्योगों के लिए सीवेज का पानी साफ करने और दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने में भी उतनी ही तेजी क्यों नहीं दिखाई जा रही है।
राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित 265 तालुकाओं के लिए राहत उपायों की घोषणा की है। इनमें फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली पर राहत, भूमि राजस्व में रियायत और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत शामिल है। जरूरत वाले इलाकों में पीने के पानी के टैंकर उपलब्ध कराने, चारे की व्यवस्था करने और जल संरक्षण से जुड़े काम शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। फसल नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद किसानों को वित्तीय सहायता देने के लिए अलग सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।