तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने करूर भगदड़ हादसे के एक साल पूरा होने पर 41 मृतकों को याद किया। उन्होंने कहा कि यह त्रासदी उनके और इससे प्रभावित लोगों के जीवन में ऐसा घाव छोड़ गई है, जो कभी नहीं भरता और जिसका दर्द कभी कम नहीं होता।
विजय ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर श्रद्धांजलि संदेश में मृतकों को याद किया और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि करूर, तमिलनाडु और उनकी पार्टी में इस घटना का दुख अब भी गहराई से महसूस किया जा रहा है।
करूर हादसे की बरसी पर क्या बोले सीएम विजय?
27 सितंबर 2025 को टीवीके के प्रमुख विजय की राजनीतिक रैली के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। विजय ने घटना की बरसी का जिक्र करते हुए कहा कि इस त्रासदी ने उनकी जिंदगी और इससे प्रभावित लोगों के जीवन में एक स्थायी घाव छोड़ दिया है। उन्होंने शोक में डूबे लोगों से एक-दूसरे का सहारा बनने की अपील की।
उन्होंने लिखा, "हम उन रिश्तेदारों और अपनों को खोने के दुख में हैं, जिन्हें हमने अपने दिल में बसाया था। हम खुद ही एक-दूसरे के लिए सांत्वना, सहारा और आश्रय बनेंगे। उन सभी अपनों को हमारी हृदय से श्रद्धांजलि, जो हमारी यादों में हमेशा जीवित रहेंगे।"
सरकारी नौकरी देने पर सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को लेकर कानूनी विवाद भी जारी है। जुलाई 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने 41 मृतकों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के सरकार के आदेशों को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक रोजगार में समानता और अवसर से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के तहत इस तरह की नियुक्तियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
इसके बाद अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर किसी हादसे में परिवार का कमाने वाला सदस्य मारा गया है तो राज्य सरकार की ओर से परिवार के किसी सदस्य को रोजगार देने की राहत पर रोक क्यों लगाई जानी चाहिए। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की चुनौती पर नोटिस भी जारी किया।
32 आश्रितों को दिए गए थे नियुक्ति पत्र
10 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री विजय ने करूर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के 32 कानूनी वारिसों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए थे। उस समय अदालत ने सरकार को नियुक्तियां अस्थायी तौर पर आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी और इन्हें कानूनी चुनौती के नतीजे के अधीन रखा था।
मद्रास हाईकोर्ट ने बाद में इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। अदालत ने माना था कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्तियां सांविधानिक व्यवस्था और मौजूदा भर्ती नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि पहले से अनुकंपा आधारित नियुक्तियों का इंतजार कर रहे अन्य परिवारों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हादसे की जांच भी जारी
करूर हादसे की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। मामले में हादसे के कारणों और उससे जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। एक साल बाद विजय के संदेश में फिर उन 41 लोगों की मौत और उनके परिवारों के दुख का जिक्र हुआ।