मुंबई की अदालत ने भाजपा सांसद नारायण राणे की याचिका खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत द्वारा दर्ज मानहानि मामले में समन को चुनौती दी थी। राणे ने 2023 के कोंकण महोत्सव में राउत पर आपत्तिजनक बयान दिया था। अदालत ने माना कि समन कानूनन सही है और अब मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट में आगे बढ़ेगा।
शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद संजय राउत द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद नारायण राणे को बड़ा झटका लगा है। मुंबई की एक विशेष अदालत ने राणे की वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने कोर्ट के समन आदेश को चुनौती दी थी। यह मामला राउत के खिलाफ कथित झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान से जुड़ा है, जो राणे ने जनवरी 2023 में मुंबई के भांडुप में आयोजित कोंकण महोत्सव में दिया था।
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नारायण राणे ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि संजय राउत का नाम मतदाता सूची में ही नहीं था, और उन्होंने ही राउत को राज्यसभा में पहुंचाने में मदद की थी जब वे (राणे) शिवसेना में थे। इस बयान को संजय राउत ने झूठा और मानहानिकारक बताया और इसी के आधार पर उन्होंने अप्रैल 2023 में मझगांव की मजिस्ट्रेट अदालत में एक आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए समन जारी किया
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए भाजपा सांसद नारायण राणे को समन जारी किया था। राणे ने इसे न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग किए बिना लिया गया निर्णय बताया और विशेष अदालत (MPs और MLAs के मामलों के लिए गठित) में समन रद्द करने की याचिका दाखिल की थी। उनका तर्क था कि उनके बयान में ऐसा कोई तत्व नहीं है जिससे आपराधिक मानहानि का मामला बनता हो।
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राउत की ओर से समन को जायज ठहराया गया
संजय राउत के वकील सार्थक शेट्टी ने अदालत में कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और आरोपी के खिलाफ स्पष्ट रूप से मानहानि का मामला बनता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बयान से राउत की छवि को सार्वजनिक रूप से नुकसान पहुंचा है, इसलिए समन पूरी तरह उचित है।
अदालत ने नहीं मानी राणे की दलील
अदालत ने बुधवार को नारायण राणे की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह माना कि मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है। हालांकि विस्तृत आदेश अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राउत के पक्ष में यह फैसला आने से उन्हें कानूनी बढ़त जरूर मिली है।
अब मजिस्ट्रेट अदालत में जारी रहेगा मामला
इस फैसले के बाद मानहानि मामले की सुनवाई अब मझगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट में आगे बढ़ेगी। अदालत तय करेगी कि राणे के बयान वास्तव में राउत की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं या नहीं। यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें महाराष्ट्र की दो प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के बीच सीधा टकराव है।