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Maharashtra: CM फडणवीस के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट का मामला, कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से किया इनका

Mon, 23 Jun 2025 10:59 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। मामले में कोर्ट ने कहा- वे अभियोजन पक्ष की दलील से सहमत हैं और सजा की गंभीरता को देखते हुए, आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता है।
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देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बारे में सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बता दें कि, इसमें शामिल आरोपी राज्य के पुणे जिले का ही निवासी है।
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भाजपा नेता की शिकायत केस दर्ज
जानकारी के मुताबिक, साइबर पुलिस ने भाजपा नेता योजना थोकले की शिकायत पर धर्म, जाति आदि के आधार पर कई समूहों के बीच दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना की भावनाओं को बढ़ावा देने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत संतोष दारेकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज की याचिका
मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत काले ने शनिवार को आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत की तरफ से दिए गए आदेश की प्रति सोमवार को मिली, जिसमें कहा गया है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी ने यह दलील दी कि उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आरोपी ने कहा- उसे फंसाया गया है
अदालत ने कहा, 'आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।' वहीं आरोपी संतोष दारेकर ने अपनी याचिका में जमानत का अनुरोध करते हुए दावा किया कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने संतोष दारेकर की याचिका का विरोध किया और कहा कि आरोपी ने प्रथम दृष्टया कथित अपराध किया है और उसका मोबाइल फोन (पोस्ट साझा करने के लिए इस्तेमाल किया गया) जब्त किया जाना चाहिए।
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अभियोजन पक्ष की दलील को कोर्ट ने माना उचित
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने माना कि संतोष दारेकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के लिए अभियोजन पक्ष की तरफ से दी गई दलील 'प्रथम दृष्टया उचित' है। अदालत ने फैसला सुनाया, 'आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य, अपराध की प्रकृति और सजा की गंभीरता को देखते हुए, आरोपी को अग्रिम जमानत देने का कोई मामला नहीं बनता है।'

 
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