महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने एससी-एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार सात किसानों को बरी करने का आदेश दिया है। आदिवासी किसानों पर आरोप था कि उन्होंने गांव के एक व्यक्ति की पिटाई की थी। जिसमें पीड़ित व्यक्ति घायल हो गया था। पीड़ित की शिकायत पर सातों किसानों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट (Prevention of Atrocities) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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व्यक्ति की पिटाई करने के मामले में थे आरोपी
विशेष जज (SC-ST Act) एएस भागवत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजक पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जुलाई 2016 में आरोपियों ने लाठी-डंडों के साथ पीड़ित पर हमला किया। पीड़ित खड़कपाड़ा के वासुरी गांव का निवासी है और ठाकुर समुदाय से ताल्लुक रखता है। आरोप था कि आरोपियों ने पीड़ित की झोपड़ी में भी तोड़-फोड़ की और उसके सामान को भी सड़क पर फेंक दिया था।
अब जज ने इस मामले में आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें बरी करने का आदेश दिया है। जज ने कहा कि आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया। इस मामले में जो सबूत पेश किए गए वह विरोधाभासी, अस्पष्ट हैं। अभियोजक पक्ष इस मामले को साबित नहीं कर सका और यह सिर्फ शंकाओं पर आधारित है।