मुंबई को 'मुर्गी' कहने पर भाजपा विधायक ने जताई आपत्ति
वहीं, भाजपा विधायक मनीषा चौधरी ने बुधवार को राकांपा नेता छगन भुजबल की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने मुंबई को सोने का अंडा देने वाली कोम्बडी (मुर्गी) कहा। मुंबई के हिसर से विधायक चौधरी ने यहां विधानसभा परिसर में पत्रकारों से कहा कि विधानसभा में पूरक मांगों के दौरान भुजगल ने महाराष्ट्र की राजधानी को 'मुर्गी' कहा।
जब उन्होंने इसका विरोध किया तो भुजबल ने कहा, आप बैठ जाइए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सभी महिला विधायकों का अपमान है। इससे पहले भुजबल ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह मुंबई में बुनियादी सुविधाओं में सुधार और प्रदूषण पर लगाम लगाने की जरूरत को लेकर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, इस मुद्दे को उठाते हुए मैंने कहा कि मुंबई वह मुर्गी है जो सोने का अंडा देती है, इसे मत मारो। मेरा कहना था कि कृपया शहर को बचाएं। लेकिन, दुर्भाग्य से हमारी एक बहन ने कहा कि आपने मुंबई को 'कोम्बडी' (मुर्गी) क्यों कहा। यह एक लोकप्रिय मुहावरा है।
एमएलसी कपिल पाटिल के दावों की जांच करेगी राज्य सरकार
एमएलसी कपिल पाटिल ने विधान परिषद में आरोप लगाए थे कि महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासी क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने के लिए 36 करोड़ रुपये की बढ़ी हुई कीम पर किताबें खरीदीं। राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस पर जांच का आश्वासन दिया है।
एमएलसी कपिल ने आरोप लगाए थे कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासीय क्षेत्रों में पुस्तकालय खोलने के लिए कुछ महीने पहले छत्तीस करोड़ की कीमत पर किताबें खरीदीं, जबकि किताबों की मूल कीमत दो करोड़ रुपये भी नहीं है। उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्रालय संभालने वाले चंद्रकांत पाटिल ने कहा, राज्य सरकार सदस्य कपिल पाटिल द्वारा किए गए दावों की जांच करेगी कि क्या सामाजिक न्याय विभाग ने बढ़ी हुई कीमत पर किताबें खरीदीं। हम सदने के सामने विवरण पेश करेंगे।
कपिल पाटिल ने कहा था, नियुक्त एजेंसी ने राज्य से 36 करोड़ रुपये वसूले जो बहुत गंभीर मामला है और इसकी जांच की जानी चाहिए। मंत्री ने स्प्षट किय कि इन पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई एक भी पुस्तक बाबासाहेब अंबेडकर, महात्मा गांधी, सावित्री बाई फुले, ज्योतिबा फुले और कर्मवीर भाऊराव पाटिल के जीवन को लेकर नहीं है। उन्होंने कहा, खरीदी गई एक भी किताब उनके काम, उनके विचारों आदि के बारे में नहीं है। सामाजिक न्याय विभाग के लिए किताबें खरीदने के लिए शब्दावली एजेंसी नियुक्त की गई थी। ऐसा लगता है कि उन्होंने असंबंधित किताबें खरीदी हैं, जो अब वितरित होने जा रही हैं। इसे रोका जाना चाहिए और भुगतान तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
बयानबाजी बंद करे कर्नाटक, वरना करना होगा जलापूर्ति पर पुनर्विचार
महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के मुद्दे पर लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के मंत्री शंभूराज देसाई ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को धमकी दी कि अगर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई गैर-जिम्मेदाराना बयान देना बंद नहीं करते, तो महाराष्ट्र को अपने बांधों से पड़ोसी राज्य को पानी मुहैया कराने के बारे में फिर से विचार करना होगा। शंभूराज देसाई ने कर्नाटक सरकार के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र को एक इंच भी जमीन नहीं देंगे।
क्या कहा था बोम्मई ने?
कर्नाटक विधानसभा में सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान बोम्मई ने कहा था कि सीमा का मुद्दा सुलझा हुआ है और पड़ोसी राज्य को एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी। देसाई ने कहा कि वह कर्नाटक सरकार की ऐसी टिप्पणियों की निंदा करते हैं और सांविधानिक पद पर रहते हुए ऐसे बयान देना बोम्मई को शोभा नहीं देता। जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो उन्हें इस तरह की उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।