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Maharashtra: नागपुर भूमि आवंटन को लेकर हंगामा, विधान परिषद तीन बार स्थगित, BJP ने भुजबल के बयान पर जताई आपत्ति

Wed, 21 Dec 2022 10:34 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

दोनों पक्षों के बीच बहस नहीं थमी तो सदन की अध्यक्षता कर रहे नरेंद्र दराडे ने कार्यवाही को पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद फिर जब सदन शुरू हुआ तो फडणवीस ने कहा, जब चर्चा मंगलवार को खत्म हो गई थी, तो हम सदन में फिर से इस मुद्दे पर चर्चा क्यों कर रहे हैं?
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महाराष्ट्र विधान परिषद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधान परिषद में बुधवार को नागपुर भूमि आवंटन मामले को लेकर विपक्ष के जोरदार हंगामा किया। इसके चलते विधान विधान परिषद को तीन बार स्थगित किया गया। नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने लगातार दूसरे दिन सदन में यह मुद्दा उठाया, जिस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताई।

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पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने शिंदे के फैसले पर यथास्थिति का आदेश दिया। शिंदे पिछली महाविकास अघाड़ी सरकार में शहरी विकास मंत्री थे। यह मामला तब का ही है। विपक्षी सदस्यों ने मंगलवार को शिंदे का इस्तीफा मांगा लेकिन उन्होंने यह कहते हुए उनकी मांग को खारिज कर दिया कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। 

दानवे ने मंगलवार को कहा, शहरी विकास विभाग के तहत आने वाले नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए घरों के निर्माण के लिए शहर में  4.5 करोड़ का एक भूखंड आरक्षित किया था। उद्धव गुट के शिवसेना नेता ने दावा कि शिंदे ने 1.5 करोड़ रुपये की लागत से 16 लोगों को जमीन सौंपने का आदेश जारी किया। जमीन की मौजूदा कीम 83 करोड़ रुपये है।  

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उन्होंने बुधवार को कहा, नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के प्रमुख मनोज कुमार सूर्यवंशी ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि एक परिवार के लोगों को एक से अधिक प्लॉट मिले हैं। इसलिए प्लॉट वितरण को नियमित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि शिंदे ने भूमि आवंटन को नियमित करने का आदेश दिया था। इससे पहले दानवे ने सत्ता पक्ष के सदस्यों के आगे चिल्लाना शुरू कर दिया और उनका भाषण बाधित कर दिया। 

भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई कि दानवे हर दिन इसी मुद्दे को उठा रहे हैं, जबकि राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मंगलवार को विधान परिषद में इस पर जवाब दे चुके हैं। 

दोनों पक्षों के बीच बहस नहीं थमी तो सदन की अध्यक्षता कर रहे नरेंद्र दराडे ने कार्यवाही को पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद फिर जब सदन शुरू हुआ तो फडणवीस ने कहा, जब चर्चा मंगलवार को खत्म हो गई थी, तो हम सदन में फिर से इस मुद्दे पर चर्चा क्यों कर रहे हैं? हर कोई जानता है कि मामला विचाराधीन है, फिर हम सदन में इस पर चर्चा क्यों कर रहे हैं। 

हालांकि, दानवे और उनकी पार्टी के सहयोगी अनिल परब ने तर्क दिया कि इस सदन को किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने का पूरा अधिकार है। इसके बाद दोनों पक्षों ने बहस पीछे हटने से इनकार किया तो सदन को पंद्रह मिनट के लिए फिर स्थगित कर दिया गया। इसके बाद फिर कार्यवाही शुरू हुई तो दराडे ने दोनों पक्षों से मर्यादा बनाए रखने की अपील की। लेकिन सदस्यों ने उनकी अपील को नजरअंदाज किया। इसके बाद दराडे ने सदन की कार्यवाही को फिर पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिया। 

मुंबई को 'मुर्गी' कहने पर भाजपा विधायक ने जताई आपत्ति
वहीं, भाजपा विधायक मनीषा चौधरी ने बुधवार को राकांपा नेता छगन भुजबल की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने मुंबई को सोने का अंडा देने वाली कोम्बडी (मुर्गी) कहा। मुंबई के हिसर से विधायक चौधरी ने यहां विधानसभा परिसर में पत्रकारों से कहा कि विधानसभा में पूरक मांगों के दौरान भुजगल ने महाराष्ट्र की राजधानी को 'मुर्गी' कहा। 

जब उन्होंने इसका विरोध किया तो भुजबल ने कहा, आप बैठ जाइए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सभी महिला विधायकों का अपमान है। इससे पहले भुजबल ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह मुंबई में बुनियादी सुविधाओं में सुधार और प्रदूषण पर लगाम लगाने की जरूरत को लेकर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, इस मुद्दे को उठाते हुए मैंने कहा कि मुंबई वह मुर्गी है जो सोने का अंडा देती है, इसे मत मारो। मेरा कहना था कि कृपया शहर को बचाएं। लेकिन, दुर्भाग्य से हमारी एक बहन ने कहा कि आपने मुंबई को 'कोम्बडी' (मुर्गी) क्यों कहा। यह एक लोकप्रिय मुहावरा है। 

एमएलसी कपिल पाटिल के दावों की जांच करेगी राज्य सरकार
एमएलसी कपिल  पाटिल ने विधान परिषद में आरोप लगाए थे कि महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासी क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने के लिए 36 करोड़ रुपये की बढ़ी हुई कीम पर किताबें खरीदीं। राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस पर जांच का आश्वासन दिया है। 

एमएलसी कपिल ने आरोप लगाए थे कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने दलित आवासीय क्षेत्रों में पुस्तकालय खोलने के लिए कुछ महीने पहले छत्तीस करोड़ की कीमत पर किताबें खरीदीं, जबकि किताबों की मूल कीमत दो करोड़ रुपये भी नहीं है। उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्रालय संभालने वाले चंद्रकांत पाटिल ने कहा, राज्य सरकार सदस्य कपिल पाटिल द्वारा किए गए दावों की जांच करेगी कि क्या सामाजिक न्याय विभाग ने बढ़ी हुई कीमत पर किताबें खरीदीं। हम सदने के सामने विवरण पेश करेंगे। 

कपिल पाटिल ने कहा था, नियुक्त एजेंसी ने राज्य से 36 करोड़ रुपये वसूले जो बहुत गंभीर मामला है और इसकी जांच की जानी चाहिए। मंत्री ने स्प्षट किय  कि इन पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई एक भी पुस्तक बाबासाहेब अंबेडकर, महात्मा गांधी, सावित्री बाई फुले, ज्योतिबा फुले और कर्मवीर भाऊराव पाटिल के जीवन को लेकर नहीं है। उन्होंने कहा, खरीदी गई एक भी किताब उनके काम, उनके विचारों आदि के बारे में नहीं है। सामाजिक न्याय विभाग के लिए किताबें खरीदने के लिए शब्दावली एजेंसी नियुक्त की गई थी। ऐसा लगता है कि उन्होंने असंबंधित किताबें खरीदी हैं, जो अब वितरित होने जा रही हैं। इसे रोका जाना चाहिए और भुगतान तत्काल बंद किया जाना चाहिए। 
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बयानबाजी बंद करे कर्नाटक, वरना करना होगा जलापूर्ति पर पुनर्विचार
महाराष्ट्र-कर्नाटक के बीच जारी सीमा विवाद के मुद्दे पर लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र के मंत्री शंभूराज देसाई ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को धमकी दी कि अगर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई गैर-जिम्मेदाराना बयान देना बंद नहीं करते, तो महाराष्ट्र को अपने बांधों से पड़ोसी राज्य को पानी मुहैया कराने के बारे में फिर से विचार करना होगा। शंभूराज देसाई ने कर्नाटक सरकार के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र को एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। 

क्या कहा था बोम्मई ने?
कर्नाटक विधानसभा में सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान बोम्मई ने कहा था कि सीमा का मुद्दा सुलझा हुआ है और पड़ोसी राज्य को एक इंच भी जमीन नहीं दी जाएगी। देसाई ने कहा कि वह कर्नाटक सरकार की ऐसी टिप्पणियों की निंदा करते हैं और सांविधानिक पद पर रहते हुए ऐसे बयान देना बोम्मई को शोभा नहीं देता। जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो उन्हें इस तरह की उकसाने वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 
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