पहले चरण के ऑपरेशन के बाद अब छह महीने बाद दूसरे चरण का ऑपरेशन किया जाएगा। महाराष्ट्र के बीड जिले में तैनात ललिता साल्वे साल 2010 में महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती हुई थीं। साल 2017 में उन्होंने लिंग परिवर्तन के लिए छुट्टी मांगी थी, जिसे नकार दिया गया था। इसके बाद ललिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मुख्यमंत्री
देवेंद्र फडणवीस ने इसका संज्ञान लिया और कोर्ट के आदेश के बाद एक मेडिकल बोर्ड गठित किया। विशेषज्ञों के एक पैनल ने पाया कि ललिता के अंदर महिला के एक भी हार्मोंस नहीं हैं। उनके शरीर में एक अविकसित लिंग भी मिला। जांच में यह भी पता चला कि 1995 में जब वह सात साल की थी।
तब डॉक्टरों ने उसका लिंग ट्यूमर समझकर काट दिया था। बीते रविवार को ललिता को एसपी श्रीधर का पत्र मिला जिसमें लिखा था कि ललिता अपना लिंग परिवर्तन करा सकती है और उसके बाद वह पुरानी पहचान के साथ नौकरी भी कर सकेगी।