Maharashtra: छत्रपति संभाजीनगर जिले के एक बाढ़ प्रभावित किसान दिगंबर सुधाकर तांगड़े ने दावा किया कि सरकार की ओर से उन्हें मात्र छह रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि इतने में तो एक कप चाय भी नहीं मिलती।
महाराष्ट्र में अतिवृष्टि व बाढ़ के कारण हजारों की किसानों की फसलें चौपट हो गईं और वे मदद के लिए दर-दर भटकते रहे लेकिन कहीं कोई उम्मीद नजर नहीं आई। अब जब सरकार को उनका सहारा बनना था तो वह भी उनके जख्मों पर मुआवजे की मरहम लगाने की बजाय चार-छह रूपये देकर नमक छिड़कने का काम कर रही है।
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ताजा मामला छत्रपति संभाजीनगर जिले के किसान दिगंबर सुधाकर तांगड़े से जुड़ा है। उन्होंने दावा है कि सरकार की ओर से उन्हें मात्र छह रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। इतने में तो एक कप चाय भी नहीं मिलती। उन्होंने मदद के नाम पर इसे किसानों का अपमान और उनके साथ भद्दा मजाक बताया।
हाल ही में, अकोला जिले के कुछ गांवों के किसानों ने दावा किया कि उन्हें भारी बारिश के कारण हुई फसल के नुकसान के लिए केंद्रीय बीमा योजना के तहत केवल तीन रुपये और 21 रुपये का मुआवजा मिला है।
'आर्थिक मदद नहीं कर्ज माफी चाहिए'
पत्रकारों से बात करते हुए पैठण तालुका के दवारवाड़ी गांव के निवासी तांगड़े ने कहा कि मेरे पास सिर्फ दो एकड़ जमीन है। मुझे मैसेज आया कि मेरे बैंक खाते में छह रुपये जमा हो गए हैं। यह राशि मेरे लिए एक कप चाय खरीदने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। सरकार ने किसानों के साथ बहुत बड़ा मजाक किया है।
उन्होंने आगे कहा कि हमें कर्ज माफी चाहिए और सरकार मेरे खाते में छह रुपये जमा करके किसानों के साथ मजाक कर रही है। हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन कम से कम (पूर्व मुख्यमंत्री) उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकाल में कर्ज माफी की थी। उन्होंने कहा कि लोग पिछले दो माह से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। अब वे इतनी राशि भेज रहे हैं।