जब मस्जिद गिराई गई, तब कहा थे पूर्व मुख्यमंत्री: एकनाथ शिंदे
उन्होंने आगे कहा, "मैंने चंद्रकांत पाटिल से बात की। उनके कहने का मतलब था कि जब मस्जिद गिराई जा रही थी तब पूर्व मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) और अब जो बोल रहे हैं (राज्यसभा सदस्य संजय राउत) कहां थे।" उन्होंने कहा कि शिवसेना के दिवंगत संस्थापक बाल ठाकरे ने 'गर्व के साथ कहो हम हिंदू हैं' का आह्वान किया था।
उन्होंने कहा, "बाबरी मामले में बालासाहेब लखनऊ की अदालत में गए थे। उस समय लाल कृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल और उमा भारती भी थे। वहां (अयोध्या में उस स्थल पर जहां कभी ढांचा हुआ करता था) कोई पार्टी नहीं थी, सभी भगवान राम के भक्त थे।"
हमारा हिंदुत्व राष्ट्रवाद है, भाजपा बताए उसका हिंदुत्व क्या: उद्धव ठाकरे
इससे पहले दिन में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि शिंदे को या तो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या बाबरी विध्वंस संबंधी उनकी टिप्पणी को लेकर पाटिल का इस्तीफा मांगना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि उनकी पार्टी का हिंदुत्व 'राष्ट्रवाद' है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बताना चाहिए कि उसका हिंदुत्व क्या है। शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के घटक दल हैं।
अगर बालासाहेब नहीं होते तो क्या होता?
शिंदे ने कहा कि जब मुंबई में (बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद) सांप्रदायिक दंगे भड़के तो बाल ठाकरे ने ही शहर की रक्षा की। उन्होंने कहा, "अगर बालासाहेब नहीं होते तो क्या होता? बालासाहेब ने जब भी देश या राज्य को किसी संकट का सामना करना पड़ा, उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।" उद्धव पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ने जरूरत पड़ने पर सावरकर, हिंदुत्व और राष्ट्रीय हित सहित कई मुद्दों पर साहसिक रुख अपनाया।
उन्होंने कहा, "जो लोग अब बात कर रहे हैं, उन्हें बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सावरकर का अपमान होने पर वे चुप रहे। वे सावरकर का अपमान करने वालों के साथ खड़े हैं। वे उन लोगों को गले लगा रहे हैं जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया था।" शिंदे ने दोहराया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जिन्होंने बाल ठाकरे के सपने को पूरा किया जो अयोध्या में राम मंदिर चाहते थे और अनुच्छेद 370 हटाना चाहते थे।
ओलावृष्टि के प्रभावित किसानों को मदद का आश्वासन
उन्होंने एक गांव में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का निरीक्षण किया और प्रभावित किसानों को मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, "मैंने राज्य के मुख्य सचिव और संबंधित जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि जब मैं अयोध्या में था तो फसलों के नुकसान का पंचनामा तुरंत करें।" शिंदे ने कहा कि फसलों के नुकसान का पंचनामा या नुकसान का आकलन युद्धस्तर पर किया जाएगा और किसानों को सरकार से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही एनडीआरएफ के मौजूदा मानदंडों से परे मदद देने का फैसला कर चुकी है।
किसानों के मुद्दों का न हो राजनीतिकरण
बारिश से प्रभावित किसानों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने और अयोध्या जाने को लेकर विपक्ष की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह मेरी सरकार है जिसने पूर्ववर्ती एमवीए सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा किया है। उन्होंने केवल घोषणाएं कीं, लेकिन क्या उन्होंने किसानों को पैसा दिया? लेकिन हमने पैसा दिया।
शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार केंद्रीय योजना की तर्ज पर 'नमो सम्मान शेतकारी योजना' लेकर आई है जिसमें किसानों को 6,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, "जब मैं अयोध्या गया था, तो मैंने भगवान राम से प्रार्थना की थी कि किसान आपदाओं से सुरक्षित रहें। मैंने प्रार्थना की कि किसानों को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बचाया जाए।" उन्होंने कहा कि अयोध्या से आने के बाद वह एक नई प्रेरणा से भर गए हैं।
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