महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति की एकता शहर-दर-शहर बदल रही है और 15 जनवरी को कई जगह मुकाबला बहुकोणीय होने वाला है। कई शहरों में पुरानी साझेदारी की डोर कहीं बंधी है, कहीं ढीली दिख रही है। कुल मिलाकर राजनीति की हवा हर शहर में अलग सुर में बह रही है।
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) की एकता जगह-जगह अलग-अलग रंग दिखा रही है। पुणे में जहां गठबंधन बनाए रखने के दावे हो रहे हैं, वहीं लातूर और जालना में सहयोगी दल अलग राह पकड़ते नजर आ रहे हैं। राज्य में निकाय चुनाव के लिए 2 जनवरी तक नाम वापसी का समय है। तब तक कुछ शहरों में समझौते की गुंजाइश बाकी है।
पुणे में गठबंधन कायम, सीटों पर खींचतान
पुणे नगर निगम (पीएमसी) की 165 सीटों को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। स्थानीय स्तर पर गठबंधन टूटने की चर्चाएं रहीं, लेकिन शिवसेना मंत्री उदय सामंत ने साफ कहा कि 29 नगर निगमों के लिए गठबंधन पूरी तरह कायम है। उनका कहना है कि दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को एबी फॉर्म दिए हैं और 2 जनवरी (नाम वापसी की अंतिम तारीख) तक सीटों पर फैसला हो सकता है। भाजपा नेताओं ने भी भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बातचीत से रास्ता निकालेंगे।
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लातूर में भाजपा अकेले मैदान में
लातूर नगर निगम (एलएमसी) में महायुति की दरार खुलकर सामने आ गई। भाजपा ने सभी 70 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का एलान किया है। भाजपा नेता संभाजीराव पाटील निलंगेकर ने कहा कि एनसीपी के साथ गठबंधन की कोशिशें हुईं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं के हस्तक्षेप से बात बिगड़ गई। उनका दावा है कि भाजपा पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी।
जालना में तीनों दल अलग-अलग
जालना नगर निगम (जेएमसी) में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी तीनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। एनसीपी ने आरोप लगाया कि उसे नजरअंदाज किया गया, इसलिए वह अकेले मैदान में उतरी है। नामांकन के आखिरी दिन भाजपा और शिवसेना ने सभी 65 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उधर, विपक्षी महाविकास आघाड़ी (कांग्रेस, शिवसेना-यूबीटी, एनसीपीए-एसपी) ने सीटों का बंटवारा तय कर लिया है।