मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। दरअसल सीबीआई ने परमबीर सिंह के खिलाफ कथित जबरन उगाही मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर मामले को बंद करने की अपील की है। परमबीर सिंह पर थाणे के एक बिजनेसमैन से कथित तौर पर दो करोड़ रुपये की जबरन उगाही करने के आरोप लगे थे।
सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कही ये बात
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि 'शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत नहीं हैं। साथ घटना के पांच साल बाद शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता कथित उगाही के रुपयों की डिलीवरी के लिए हुई बैठकों की कोई सटीक तारीख, समय या स्थान नहीं बता सका। आरोपी के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए कोई पुख्ता सबूत भी नहीं हैं।' थाणे के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में यह क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
परमबीर सिंह पर लगे थे ये आरोप
परमबीर सिंह और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कहा गया था कि नवंबर 2016 से लेकर मई 2018 के बीच दो करोड़ रुपये की उगाही की गई। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में जो संपत्ति बेची गई, उसके भी पूरे वैध दस्तावेज हैं। शिकायतकर्ता बिजनेसमैन शरद अग्रवाल ने साल 2021 में दर्ज एफआईआर में बताया था कि संजय पुनमिया, सुनील जैन, मनोज घोटकर और परमबीर सिंह ने एक दूसरे को फायदा पहुंचाने के लिए दो करोड़ रुपये की उगाही की थी। इसके लिए उसकी एक जमीन को बेचा गया था। एफआईआर थाणे के कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को मिल गई थी। सीबीआई ने दावा किया है कि शरद अग्रवाल ने अपनी मर्जी से जमीन का सौदा किया था और इसके लिए उस पर कोई दबाव नहीं था।
परमबीर सिंह ने ही साल 2021 में महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों से महाराष्ट्र की राजनीति में काफी हंगामा हुआ और अनिल देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद अनिल देशमुख को जेल भी हुई थी। हालांकि आरोपों के बाद परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था और उनके खिलाफ कई अलग-अलग मामले दर्ज हुए।