महाराष्ट्र के पालघर और भंडारा-गोंदिया लोकसभा उपचुनाव में वीवीपीएटी और ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत से कई जगह बवाल मच गया। इसके चलते मतदान के लिए आए मतदाताओं को चिलचिलाती धूप में बैरंग वापस लौटना पड़ा। हालांकि पालघर लोकसभा क्षेत्र में मतदान का समय बढ़ाया गया। वहीं, कांग्रेस और एनसीपी ने ईवीएम खराबी वाले जगहों पर पुन: मतदान की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया।
पालघर और भंडारा-गोंदिया में करीब 242 मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपीएटी में खराबी की शिकायतें मिली। अधिकांश केंद्रों पर वीवीपीएटी में खराबी के चलते पुन: मतदान की मांग की गई लेकिन, नामंजूर कर दिया गया। पालघर के जिलाधिकारी प्रशांत नारनवरे ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 15 प्रतिशत ईवीएम रिजर्व रखे गए थे।
इस दौरान चुनाव आयोग ने ईवीएम की दुरुस्ती के लिए 96 इंजीनियर्स तैनात किए थे। जहां भी ईवीएम या वीवीपीएटी में खराबी की शिकायत मिली उसे जल्द दूर किया गया और मशीनें बदल दी गईं। हालांकि जिलाधिकारी ने स्वीकार किया कि 10 प्रतिशत ईवीएम में खराबी की शिकायतें मिलीं। मशीन खराब होने से मतदान में विलंब होने के कारण मतदान की समयसीमा भी बढ़ाई गई।
गुजरात से ईवीएम-वीवीपीएटी मंगाने पर विपक्ष ने भाजपा को घेरा
पालघर और भंडारा-गोंदिया में ईवीएम और वीवीपीएटी में खराबी पर विपक्ष ने भाजपा की खिंचाई की। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने सूरत और बडोदा से वीवीपीएटी मंगाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब राज्य में ईवीएम और वीवीपीएटी पर्याप्त संख्या में हैं तो फिर सूरत और बड़ौदा से क्यों मंगाई गई।
बहुजन विकास आघाड़ी के हितेंद्र ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना रही हैं। वहीं, शिवसेना सचिव अनिल देसाई ने ईवीएम में खराबी पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में ईवीएम में खराबी चुनाव आयोग की असफलता है।