महाराष्ट्र के रायगढ़ में शनिवार को हुए बस हादसे में 33 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है। ये सभी लोग बालासाहेब सावंत कृषि विश्वविद्यालय के कर्मचारी थे और राज्य के मशहूर पर्यटन स्थल महाबलेश्वर पिकनिक के लिए जा रहे थे।
विश्वविद्यालय के निदेशक संजय भावे के अनुसार करीब 40 कर्मचारियों ने महाबलेश्वर पिकनिक जाने की तैयारी की थी, लेकिन अंतिम समय में सिर्फ 31 कर्मचारी ही महाबलेश्वर के लिए रवाना हुए थे। जिन कर्मचारियों ने पिकनिक जाने से परहेज किया था, उनके परिवार वालों भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।
वहीं, प्रवीण रणदीवे नामक कर्मचारी ने इस दुखद घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वो भी अपने सभी साथियों के साथ पिकनिक मनाने जाने वाले थे, लेकिन अचानक तबीयत खराब होने की वजह से वो नहीं जा सके। उन्होंने बताया कि एक व्हाट्सएप ग्रुप पर सभी साथी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। हादसे से पहले वो लगातार ग्रुप पर फोटो और पोस्ट शेयर कर रहे थे। लेकिन 11 बजे के बाद से अचानक ग्रुप पर सन्नाटा छा गया। दोपहर के 12.30 बजे चुके थे, लेकिन किसी का कोई पोस्ट नहीं आया। उन्होंने ग्रुप में मैसेज भी किया, लेकिन किसी का कोई जवाब नहीं आया।
प्रवीण ने सोचा कि शायद खाना खाने के लिए सभी बस से उतरे होंगे, इसलिए जवाब नहीं दे रहे। लेकिन तभी उन्हें जानकारी मिली कि जिस बस से उनके सभी साथी महाबलेश्वर जा रहे थे, वो पोलादपुर स्थित अंबेनली घाट के पास 200 फीट गहरी खाई में गिर गई है। इस घटना ने प्रवीण को स्तब्ध कर दिया।
उन्होंने बताया कि इस हादसे में उनके जिन साथियों की मौत हुई है, उनमें अधिकतर अविवाहित थे। इस हादसे में उनका एक साथी प्रकाश सावंत बच गया। बस जब खाई में गिरने लगी, ठीक उसी वक्त प्रकाश बस से कूद गए, जिससे उनकी जान बच गई।
प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने सभी मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है।