शिवसेना में बगावत का नेतृत्व करने वाले एकनाथ शिंदे को भाजपा नेतृत्व दो तिहाई विधायक जुटाने की स्थिति में मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर चुका था। हालांकि इसकी जानकारी फडणवीस को बृहस्पतिवार दोपहर पार्टी के राज्य के प्रभारी सीटी रवि के माध्यम से मिली।
महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा ने अंतिम समय में जो दांव चला उसके पीछे राज्य में नए नेतृत्व और नए समीकरणों के सहारे आगे बढ़ने की तैयारी है। एकनाथ शिंदे को सीएम और देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाकर भाजपा नेतृत्व ने बड़े बदलाव का साफ संदेश दिया है। राज्य के पिछड़ों में अच्छा आधार बना चुकी भाजपा की निगाहें अब मराठा वर्ग पर है।
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शिवसेना में बगावत का नेतृत्व करने वाले एकनाथ शिंदे को भाजपा नेतृत्व दो तिहाई विधायक जुटाने की स्थिति में मुख्यमंत्री बनाने का वादा कर चुका था। हालांकि इसकी जानकारी फडणवीस को बृहस्पतिवार दोपहर पार्टी के राज्य के प्रभारी सीटी रवि के माध्यम से मिली। शिवसेना में बगावत का सिलसिला शुरू होने के साथ ही फडणवीस मुख्यमंत्री बनने को लेकर आश्वस्त थे। बुधवार को उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद ही उन्होंने बधाइयां स्वीकारनी शुरू कर दी थी।
अंतिम समय में खोला पत्ता
भाजपा नेतृत्व ने अंतिम समय में अपना पत्ता खोला। फडणवीस से अंतिम समय में एकनाथ शिंदे को सीएम बनाने की घोषणा कराई गई। इसके बाद शपथ ग्रहण से चंद मिनट पहले उन्हें सरकार में शामिल होने और डिप्टी सीएम बनने का निर्देश दिया गया। दरअसल भाजपा को आशंका थी कि अगर उद्धव के इस्तीफे के तत्काल बाद ब्राह्मण बिरादरी के फडणवीस को सीएम की कुर्सी दी गई तो इसका गलत राजनीतिक संदेश जाएगा।
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मंत्रियों की टीम में दिखेगी भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग : उत्तर प्रदेश की तरह महाराष्ट्र में भी भाजपा सभी वर्गों में पैठ बनाना चाहती है। इस रणनीति के तहत पार्टी मंत्रिमंडल में मराठा, पिछड़ा, दलित बिरादरी को विशेष तरजीह देगी।
बागी विधायकों को निलंबित करने की अर्जी पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
शिवसेना (उद्धव गुट) के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और 15 अन्य विधायकों को उनकी अयोग्यता पर अंतिम निर्णय होने तक निलंबित करने का निर्देश देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। प्रभु की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, चूंकि शिंदे गुट का भाजपा में विलय नहीं हुआ है, ऐसे में जिस क्षण उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली उन्होंने दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया। पीठ ने कहा, हमने आंखें बंद नहीं की हैं... हम मामले का परीक्षण करेंगे। सुनवाई 11 जुलाई को बागी विधायकों की याचिका के साथ होगी।