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Maharashtra: बावनकुले बोले- निजी कंपनी भी पट्टे पर ले सकेगी बंजर आदिवासी जमीन, कानून बनाएगी CM फडणवीस की सरकार

Sat, 20 Sep 2025 06:40 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

महाराष्ट्र सरकार आदिवासियों को अपनी बंजर जमीन निजी कंपनियों को पट्टे पर देने की अनुमति देने जा रही है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इसके लिए नया कानून लाया जाएगा। न्यूनतम पट्टा किराया 50,000 रुपये प्रति एकड़ तय होगा। खनिज उत्खनन के लिए भी एमओयू किया जा सकेगा।
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चंद्रशेखर बावनकुले - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि जल्द ही राज्य के आदिवासी अब अपनी बंजर जमीन निजी कंपनियों को पट्टे पर दे सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य आदिवासियों की आय बढ़ाना और उन्हें जमीन के मालिकाना हक से वंचित किए बिना अतिरिक्त आमदनी दिलाना है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इसके लिए जल्द ही एक कानून लाया जाएगा।
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कांग्रेस ने हालांकि इस कदम पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार का यह निर्णय आदिवासियों के हितों की रक्षा करने के बजाय बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाएगा और आदिवासियों का शोषण होगा। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम आदिवासियों को सीधी आमदनी और लंबे समय तक सुरक्षा देगा।

सरकार बोली- आय का नया अवसर
बावनकुले ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि आदिवासी किसानों को इस फैसले से सीधा फायदा होगा। यदि कोई आदिवासी किसान किसी उद्योगपति के साथ साझेदारी में अपनी जमीन विकसित करना चाहता है, तो अब वह सीधे जिला कलेक्टर से अनुमति लेकर ऐसा कर सकेगा। पहले ऐसी सभी मंजूरियां मंत्रालय (मंत्रालय मुंबई) से लेनी पड़ती थीं, जिससे प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्तावित कानून केवल बंजर जमीन पर लागू होगा। उपजाऊ जमीन को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि उन्हें पालघर और नंदुरबार जिलों के कई आदिवासी जमीन मालिकों से अनुरोध मिले हैं।

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सोलर प्रोजेक्ट्स और सालाना आमदनी
बावनकुले ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई निजी कंपनी सरकारी योजना के तहत सोलर पैनल लगाना चाहती है, तो वह सीधे आदिवासी जमीन मालिक के साथ समझौता कर सकती है। जमीन का मालिकाना हक आदिवासी के पास ही रहेगा और उसे हर साल निश्चित राशि के रूप में भुगतान मिलेगा। उन्होंने कहा कि बंजर जमीन से ऐसी आमदनी पहले संभव नहीं थी, लेकिन अब इससे जीवन स्तर सुधर सकता है।

मालिकाना हक रहेगा सुरक्षित
राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून में मालिकाना हक पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। यदि जमीन लंबे समय के लिए पट्टे पर दी जाती है, तब भी मालिक को हर साल तय रकम मिलती रहेगी। इससे आदिवासी जमीन का हक नहीं खोएंगे।

उन्होंने बताया कि समझौते में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर की भूमिका अनिवार्य होगी। यही नहीं, न्यूनतम पट्टा किराया प्रति एकड़ 50,000 रुपये या प्रति हेक्टेयर 1,25,000 रुपये सालाना तय किया गया है। किसान और निजी कंपनी चाहें तो आपसी सहमति से इससे ज्यादा रकम भी तय कर सकते हैं।

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खनिज उत्खनन का भी प्रावधान
बावनकुले ने कहा कि यदि किसी आदिवासी की जमीन पर बड़े या छोटे खनिज पाए जाते हैं, तो किसान निजी कंपनियों के साथ एमओयू कर सकेंगे। इसमें उन्हें प्रति टन या प्रति ब्रास (खनिज की माप) पर मुनाफा मिलेगा। हालांकि इस लाभ की सटीक मात्रा अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की नीति बनाई जा रही है, जिससे आदिवासी समुदाय को स्थायी आय मिले और उनका हक भी सुरक्षित रहे।

इस फैसले पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस विधायक दल के नेता और पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि यह निर्णय मूल रूप से कुछ खास उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है। उनका कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल कर आदिवासियों का शोषण किया जाएगा और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा।

क्या कहता है मौजूदा कानून?
फिलहाल आदिवासी किसान निजी कंपनियों के साथ सीधे पट्टा समझौता नहीं कर सकते। इसके लिए उन्हें राज्य स्तर से मंजूरी लेनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में कई बार लंबा समय लगता है और किसान निवेश से वंचित रह जाते हैं। सरकार का दावा है कि नए कानून से यह दिक्कत दूर होगी और आदिवासियों को सीधे निवेश तक पहुंच मिलेगी।

अधिकारियों का कहना है कि नीति का मकसद आदिवासियों को आय का स्थायी स्रोत देना और उनके मालिकाना हक को सुरक्षित करना है। अब तक लेन-देन पर कड़ी निगरानी रहती थी ताकि जमीन का दुरुपयोग न हो। लेकिन इस कारण देरी भी होती थी। प्रस्तावित कानून इस संतुलन को साधने की कोशिश करेगा।
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टेक्नोलॉजी के सही उपयोग से पुलिसिंग में नई ऊंचाई- सीएम फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि टेक्नोलॉजी का सही और निडर तरीके से उपयोग कर पुलिसिंग को नई ऊंचाई पर ले जाया जा सकता है। उन्होंने यह बात इंडियन पुलिस फाउंडेशन के वार्षिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय, मुंबई में कही। फडणवीस ने कहा कि टेक्नोलॉजी एक घोड़े की तरह है और घोड़े की दिशा तय करना सवार का काम है। अगर सही दिशा में इसका उपयोग किया जाए तो यह पुलिसिंग को अगले स्तर तक ले जा सकती है। उन्होंने बताया कि 2023 में पुलिस संगठन संरचना में बदलाव किया गया, जो 53 वर्षों में पहली बार हुआ। इस बदलाव से पुलिस को अधिक चुस्ती और आधुनिक चुनौतियों के समाधान में मदद मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सड़क अपराध कम हैं, लेकिन साइबर और व्हाइट कॉलर अपराध बड़ी चुनौती हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने देश का सबसे प्रगतिशील साइबर सुरक्षा केंद्र स्थापित किया है, जिसमें चार देशों ने सहयोग की पेशकश की है। फडणवीस ने कहा कि नई तकनीक को अपनाते समय पुराने सिस्टम को भी महत्व देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून और व्यवस्था के बिना कोई भी वित्तीय शक्ति स्थायी नहीं हो सकती।


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