महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राज्य में सूखे से निपटने के लिए बैठक की। इस दौरान उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि सूखे की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लोन की वसूली के लिए किसानों के घर न जाएं। साथ ही, अधिकारियों से यह पता लगाने के लिए भी कहा कि क्या आरबीआई ऐसी वसूली की कार्रवाई को रोकने के लिए कोई सर्कुलर जारी कर सकता है। मंगलवार को बावनकुले की अध्यक्षता में हुई सूखा राहत कैबिनेट उप-समिति की बैठक में शहरी इलाकों में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने और बचाए गए पानी को अगले साल जून तक बफर के तौर पर रखने के निर्देश भी दिया गया।
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कितने तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए गए?
मीटिंग में बताया गया कि अभी राज्य में 560 टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है। इस दौरान पैनल के सदस्यों ने अगले मॉनसून तक 10 महीनों के लिए पीने के पानी की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए सही प्लानिंग का सुझाव दिया। बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने बारिश कम होने के कारण राज्य के 358 तालुकों में से 265 तालुकों (राज्य के 74 प्रतिशत हिस्से) को सूखाग्रस्त घोषित किया है और राहत उपायों की घोषणा की है। इसमें फसल लोन का रीस्ट्रक्चरिंग, जमीन के राजस्व में छूट और बिजली बिल पर सब्सिडी भी शामिल हैं।
सूखा प्रबंधन मैनुअल 2016 एक्टिवेट
सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए सरकार ने सूखा प्रबंधन मैनुअल 2016 (2020 में अपडेटेड) और सूखा प्रबंधन कोड के तहत 'ट्रिगर-1' को एक्टिवेट कर दिया है। 'ट्रिगर-1' राज्य में सूखा फ्रेमवर्क का पहला चरण होता है। यह तब एक्टिवेट होता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज्यादा की कमी हो और साथ ही 21 दिनों तक सूखा मौसम रहे। मुख्य सचिव विनीता वेद सिंघल के अनुसार, डिविजनल कमिश्नरों से राज्य के 265 तालुकों में पानी की कमी की स्थिति की सूचना मिली है। सूखे की यह स्थिति 'ट्रिगर-1' के मानदंड में आता है, जबकि 43 तालुके 'ट्रिगर-2' के तहत योग्य पाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि 43 तालुकों और अन्य प्रभावित इलाकों के लिए जरूरी सरकारी आदेश बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के जारी किया जाना चाहिए। 'ट्रिगर-2' सूखा मूल्यांकन का दूसरा चरण है, इसमें कृषि संबंधी संकेतकों का इस्तेमाल करके सूखे की गंभीरता और वास्तविक असर का आकलन किया जाता है। इसमें मुख्य संकेतकों में फसल बोने वाले क्षेत्र का दायरा और फसल की कुल स्थिति/नुकसान, भूजल स्तर की स्थिति और बड़े जलाशयों में पानी के भंडारण की स्थिति शामिल है।
मंत्री ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिया?
बावनकुले ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस दौरान किसानों को फसल ऋण की वसूली के लिए परेशान नहीं किया जाए। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से उन्होंने यह पता लगाने को भी कहा कि क्या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ऋण वसूली को निलंबित करने के संबंध में एक परिपत्र जारी कर सकता है। मंत्री ने बताया कि सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि बैंक और क्रेडिट सोसायटी फसल ऋण की वसूली के लिए किसानों से संपर्क न करें। उन्होंने पूरी सरकारी मशीनरी, विशेषकर तलाठी, ग्राम सेवक और कृषि अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में तैनात रहने और स्थिति पर बारीकी से नजर रखने का निर्देश किया।
फसलों का सर्वेक्षण करने का सुझाव
सिंघल ने कहा कि हालांकि 96 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर फसलों की वास्तविक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक तथ्यात्मक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और 25 अक्टूबर तक इसकी अंतिम रिपोर्ट सौंपी जानी चाहिए। बावनकुले ने अधिकारियों को किसानों को हर संभव सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि फसल क्षति मूल्यांकन रिपोर्ट पर किसानों के हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चारे और पानी की कमी को मैनेज करने और बांधों और झीलों में स्टॉक के उपयोग को विनियमित करने के लिए उपायों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बड़ी निर्माण परियोजनाओं पर जैसे कि सीमेंट सड़कों और ज्यादा पानी लगने वाले कार्यों से भी प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।
जिला कलेक्टरों को क्या निर्देश मिला?
बावनकुले ने सुझाव दिया कि जिला कलेक्टरों को सूखा राहत के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि का अधिकतम उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीने के पानी और पशुओं के चारे को प्राथमिकता दी जाएगी। गांव के तालाबों और परकोलेशन टैंकों को पीने के पानी के लिए रिजर्व किया जाएगा। आवंटन की प्राथमिकता पेयजल, चारा फसलें और गेहूं और गन्ना जैसी रबी फसलें होनी चाहिए। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने पीने के पानी की कमी वाले क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक निर्माण के लिए अनुमति को अस्थायी रूप से निलंबित करने का सुझाव दिया। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि झीलों के आसपास पानी की चोरी पर अंकुश लगाया जाना चाहिए और ऐसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बिजली कनेक्शन काट दिए जाने चाहिए। कई मंत्रियों ने सुझाव दिया कि चारा डिपो को पारंपरिक चारा शिविरों का विकल्प बनाया सकता है। साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि महाराष्ट्र में उत्पादित चारे को राज्य के बाहर नहीं ले जाया जाए।
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10 महीनों की प्लानिंग का निर्देश
उप-समिति ने प्रशासन को अगले 10 महीनों के लिए पानी और चारे की आवश्यकताओं के लिए व्यापक योजना बनाते हुए रबी सीजन की तैयारी करने का निर्देश दिया। बावनकुले ने कहा कि चारा शिविरों के लिए प्रारंभिक प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में तैयार किया जाना चाहिए और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कृषि और पशुपालन विभागों के अधिकारियों की एक समिति द्वारा इसे अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव को अन्य राज्यों में अपनाए गए चारा प्रबंधन उपायों का अध्ययन करने और महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त चारा योजना तैयार करने के लिए तीन विभागों के सचिवों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया।