महाराष्ट्र में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर सरकार में भागीदार दल एनसीपी और कांग्रेस में ठन गई है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कांग्रेस विधायकों से साफ कहा कि सीएए और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव लाने की मांग न करें। उन्होंने इस कानून से किसी के प्रभावित नहीं होने का दावा करते हुए कहा कि प्रस्ताव लाने की मांग कर राज्य का माहौल खराब न करें।
कांग्रेस ने इसे एनसीपी की अपनी सोच बताया है। पार्टी विधायकों ने बिहार की तर्ज पर राज्य विधानमंडल में सीएए और एनपीआर विरोधी प्रस्ताव लाने की मांग की है। जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पहले ही साफ कर चुके हैं कि इसका राज्य के नागरिकों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। अजीत पवार ने कहा, मुख्यमंत्री भी स्पष्ट कर चुके हैं, इसलिए इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोई जरूरत नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, पार्टी मानती है कि यह संविधान के खिलाफ है, इसलिए इसका समर्थन नहीं किया जा सकता। सीएए और एनपीआर के मुद्दे पर भाजपा खुद अपनी सहयोगी पार्टियों को समझा नहीं पा रही है। यदि पवार को लगता है कि इसका राज्य में कोई असर नहीं होगा, तो हमें विस्तार से बताना चाहिए।