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घर में खड़ी गाड़ी और कट गया फास्टैग, दो गुना टोल वसूल रहे टोलप्लाजा, वाहन चालकों संग ज्यादती

Tue, 03 Mar 2020 12:02 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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टोल प्लाजा - फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित टोल प्लाजा पर ‘फास्टैग’ अनिवार्य होने के दो माह बाद भी वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ रहा है। मथुरा के व्यवसायी की गाड़ी का फास्टेग भुगतान हो गया, जबकि उनकी गाड़ी घर में खड़ी थी। इसी तरह ट्रांसपोर्ट व्यवसायी का फास्टेग रीड नहीं कर पाने पर उससे दोगुना जुर्माना भरना पड़ गया। 
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राजमार्ग के टोल प्लाजा पर फास्टैग को लेकर पैदा हो रहीं परेशानियों की यह दो उदाहरण हैं। वृंदावन के व्यवसायी भरत यादव की पजेरो गाड़ी संख्या यूके 06 डब्ल्यू-2222 घर में खड़ी थी।

27 जनवरी को उनके फास्टैग एकाउंट से फतेहपुर रामपुर टोल से 135 रुपये कट गए। इसी तरह जाखौली टोल से उनके फास्टैग से 25 रुपये 30 दिसंबर 2019 को कट गए थे। भरत ने बताया कि उन्होंने एनएचएआई के अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि मेल पर शिकायत करो। आज तक रिफंड नहीं मिल सका है। 
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ट्रांसपोर्ट कैरियर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने बताया कि वह दिल्ली जा रहे थे। महुअन टोल पर उनकी कार पर लगे फास्टैग को मशीनें रीड नहीं कर सकीं, जबकि रिचार्ज था। इसके बाद भी कर्मचारियों ने जुर्माने के तौर पर दोगुना टोल वसूल लिया। यह तो वाहन चालकों के साथ ज्यादती है। 
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कैश लेन में कम फास्टैग में ज्यादा वक्त
आगरा दिल्ली राजमार्ग हो या फिर आगरा जयपुर, टोल प्लाजा पर रीडर फास्टेग को पल झपकते ही रीड नहीं कर पा रहा है। कर्मचारी फास्टेग पढ़ने में इतना वक्त जाया कर रहे हैं, जितना कि कैश लेन पर नहीं लग रहा है। -अंशुल गुप्ता, होजरी व्यवसायी
 

रिचार्ज काउंटरों पर कर्मचारी नहीं
अलीगढ़ टोल या फिर टूंडला, रिचार्ज कराने की काउंटर तो हैं मगर इन पर कर्मचारी नहीं बैठते हैं। कई बार नेटवर्क नहीं होने की दिक्कत बता देते हैं। इससे वाहन चालक को कैश लाइन में ही लगना पड़ता है। यह समस्या खत्म होनी चाहिए। महावीर शर्मा, आटो पार्ट्स व्यवसायी

आगरा मथुरा हाईवे के महुअन व श्रीनगर टोल प्लाजा पर 78 फीसदी गाड़ियां फास्टैग से गुजर रही हैं। यह ठीक है कि कई दफा रीड करने में देरी हो रही है। यह नेटवर्क की समस्या है। फास्टैग रिचार्ज नहीं होने की दशा में ही दोगुना जुर्माना वसूला गया होगा। अगर ऐसी शिकायतें हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
मोहम्मद शफी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
 
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