बारामती सीट पर भी भाजपा पूरी ताकत लगा रही है। उसके नेताओं का मानना है कि जैसे लोकसभा चुनावों में अमेठी में राहुल को हरा कर कांग्रेस का किला ध्वस्त किया था तो बारामती में भी पवार परिवार को पराजय का स्वाद चखाया जा सकता है। यहां पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार मैदान में हैं। पवार परिवार ने करीब 50 साल की राजनीति में बारामती से कोई लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं हारा, लेकिन भाजपा चमत्कार की उम्मीद लगाए है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि 2014 और 2019 में लोकसभा चुनावों से पार्टी ने सीखा कि इस मराठा परिवार को कोई बाहरी व्यक्ति चुनौती नहीं दे सकता है मगर कोई धनगर उम्मीदवार जरूर बाजी पलट सकता है। इसलिए पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनावों में एनसीपी से बगावत करने वाले धनगर गोपीचंद पडालकर को अजित पवार के विरुद्ध मैदान में उतारा है।
कांग्रेस को चुनौती :
सोलापुर सेंट्रल
प्रणीति शिंदे क्या इस सीट से हैट्रिक लगा पाएंगी? सुशील कुमार शिंदे सोलापुर की लोकसभा सीट से पिछले दिनों चुनाव हारे हैं। ऐसे में भाजपा का उत्साह बढ़ा हुआ है। पूर्व कांग्रेसी दिलीप माने यहां शिवसेना के उम्मीदवार हैं और भाजपा उन्हें जमकर समर्थन दे रही है। कांग्रेस के महेश कोटे यहां बागी हैं। माने और कोटे कभी शिंदे के खास थे। शिंदे घूम-घूम के लिए बेटी के लिए वोट मांग रहे हैं। यहां मैदान में पांच तगड़े उम्मीदवार हैं। एआईएमआईएम के फारूख शब्दी और सीपीआई-एम के पूर्व विधायक नरसैया अदम भी मैदान में है। पिछली बार प्रणीति के बाद एआईएमआईएम को यहां सबसे ज्यादा वोट मिले थे।
भोकर
नांदेड़ में इस साल लोकसभा चुनाव हारने के बाद अशोक चव्हाण विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में वह यहां से जीते थे। पिछली बार उनकी पत्नी भोकर से चुनाव लड़ी थीं। इस बार अशोक चव्हाण फिर उतरे हैं। उन्हें भाजपा की तरफ से पूर्व सांसद भास्करराव खटकांवकर चुनौती देंगे। राज्य में यहां एक सीट पर सबसे ज्यादा 91 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद इस सीट पर ध्यान दे रहे हैं। पिछले दो साल से भाजपा चव्हाण के खिलाफ रणनीति बना रही थी। लोकसभा में उन्हें हरा कर पहली सफलता मिली थी। उसकी कोशिश अब चव्हाण को विधानसभा से भी बाहर रखने की है।
कराड दक्षिण
सातारा जिले में आने वाली यह भी कांग्रेस की परंपरागत सीट है और 1962 से पार्टी के पास है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यहां भाजपा के अतुल सुरेश भोसले के विरुद्ध लड़ रहे हैं। पिछली बार चव्हाण यहां से जीते थे। गन्ना पट्टी की इस सीट पर भाजपा की नजर है और उसने सातारा के सांसद उदयनराजे भोसले को अपनी तरफ मिलाकर एक मानसिक बढ़त बना चुकी है। शरद पवार ने चव्हाण को विधानसभा के साथ हो रहे सातारा उप-चुनाव में उदयनराजे के विरुद्ध लड़ने का प्रस्ताव दिया था परंतु उन्होंने इंकार कर दिया। भाजपा ने विकास कार्य को यहां अपना नारा बनाया है।