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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : कांग्रेस-एनसीपी के दिग्गजों के गढ़ ध्वस्त करना चाहती है भाजपा

Thu, 17 Oct 2019 07:00 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  •  दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को हराने का लक्ष्य
  • सुशील कुमार शिंदे के पारिवारिक राजनीति को तगड़ी चुनौती
  • बारामती में अमेठी जैसी जीत के चमत्कार की उम्मीद
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PM Modi in Maharashtra - फोटो : Twitter@bjp4india
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विस्तार
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भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में विपक्षी कांग्रेस-एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं को ध्वस्त करने की फिराक में है। दोनों विपक्षी पार्टियां खस्ता हाल हैं, ऐसे में भाजपा ने इनके सीनियर लीडरों की सीटों को चिह्नित किया है, जिन्हें हर हाल में जीतना चाहती है।

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भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण (भोकर), पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (कराड दक्षिण) और कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील शिंदे के बेटी प्रणीति (सोलापुर मध्य) समेत एनसीपी का गढ़ कहलाने वाली बारामती में पूरी ताकत लगा रखी है। हालांकि भाजपा की नजर गन्ना पट्टी के संगमनेर और लातूर की शहरी तथा ग्रामीण सीटों पर भी है, लेकिन इन तीनों जगहों पर कांग्रेस के नेता बेहद मजबूत हैं। यहां सेंध लगा पाना भाजपा के लिए बेहद मुश्किल है।

संगमनेर में कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष बालासाहेब थोरात हैं और यह उनके परिवार की परंपरागत सीट है। चुनाव के रिकॉर्ड भी बताते हैं कि यहां कांग्रेस के अलावा कभी कोई पार्टी नहीं जीती। बालासाहेब थोरात 2009 और 2014 में यहां से जीते। इसी तरह लातूर में भी देशमुख बंधु अमित और धीरज की जीत पक्की मानी जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बड़े बेटे अमित लातूर शहर से और धीरज लातूर ग्रामीण से मैदान में हैं। इसलिए भाजपा ने अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण समेत सुशील कुमार शिंदे की बेटी की सीट पर नजरें जमा ली हैं। भाजपा की रणनीति के मुताबिक तीनों वरिष्ठ नेता अपनी सीटों में उलझे हैं।

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बारामती सीट पर भी भाजपा पूरी ताकत लगा रही है। उसके नेताओं का मानना है कि जैसे लोकसभा चुनावों में अमेठी में राहुल को हरा कर कांग्रेस का किला ध्वस्त किया था तो बारामती में भी पवार परिवार को पराजय का स्वाद चखाया जा सकता है। यहां पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार मैदान में हैं। पवार परिवार ने करीब 50 साल की राजनीति में बारामती से कोई लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं हारा, लेकिन भाजपा चमत्कार की उम्मीद लगाए है। भाजपा सूत्र बताते हैं कि 2014 और 2019 में लोकसभा चुनावों से पार्टी ने सीखा कि इस मराठा परिवार को कोई बाहरी व्यक्ति चुनौती नहीं दे सकता है मगर कोई धनगर उम्मीदवार जरूर बाजी पलट सकता है। इसलिए पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनावों में एनसीपी से बगावत करने वाले धनगर गोपीचंद पडालकर को अजित पवार के विरुद्ध मैदान में उतारा है।

कांग्रेस को चुनौती : 
 

सोलापुर सेंट्रल
प्रणीति शिंदे क्या इस सीट से हैट्रिक लगा पाएंगी? सुशील कुमार शिंदे सोलापुर की लोकसभा सीट से पिछले दिनों चुनाव हारे हैं। ऐसे में भाजपा का उत्साह बढ़ा हुआ है। पूर्व कांग्रेसी दिलीप माने यहां शिवसेना के उम्मीदवार हैं और भाजपा उन्हें जमकर समर्थन दे रही है। कांग्रेस के महेश कोटे यहां बागी हैं। माने और कोटे कभी शिंदे के खास थे। शिंदे घूम-घूम के लिए बेटी के लिए वोट मांग रहे हैं। यहां मैदान में पांच तगड़े उम्मीदवार हैं। एआईएमआईएम के फारूख शब्दी और सीपीआई-एम के पूर्व विधायक नरसैया अदम भी मैदान में है। पिछली बार प्रणीति के बाद एआईएमआईएम को यहां सबसे ज्यादा वोट मिले थे।

भोकर
नांदेड़ में इस साल लोकसभा चुनाव हारने के बाद अशोक चव्हाण विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में वह यहां से जीते थे। पिछली बार उनकी पत्नी भोकर से चुनाव लड़ी थीं। इस बार अशोक चव्हाण फिर उतरे हैं। उन्हें भाजपा की तरफ से पूर्व सांसद भास्करराव खटकांवकर चुनौती देंगे। राज्य में यहां एक सीट पर सबसे ज्यादा 91 उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद इस सीट पर ध्यान दे रहे हैं। पिछले दो साल से भाजपा चव्हाण के खिलाफ रणनीति बना रही थी। लोकसभा में उन्हें हरा कर पहली सफलता मिली थी। उसकी कोशिश अब चव्हाण को विधानसभा से भी बाहर रखने की है।

कराड दक्षिण
सातारा जिले में आने वाली यह भी कांग्रेस की परंपरागत सीट है और 1962 से पार्टी के पास है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यहां भाजपा के अतुल सुरेश भोसले के विरुद्ध लड़ रहे हैं। पिछली बार चव्हाण यहां से जीते थे। गन्ना पट्टी की इस सीट पर भाजपा की नजर है और उसने सातारा के सांसद उदयनराजे भोसले को अपनी तरफ मिलाकर एक मानसिक बढ़त बना चुकी है। शरद पवार ने चव्हाण को विधानसभा के साथ हो रहे सातारा उप-चुनाव में उदयनराजे के विरुद्ध लड़ने का प्रस्ताव दिया था परंतु उन्होंने इंकार कर दिया। भाजपा ने विकास कार्य को यहां अपना नारा बनाया है।

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