फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Maharshtra: विधानसभा चुनाव से पहले ही अलग हो जाएंगे अजित पवार और भाजपा! महाराष्ट्र की सियासत में हालात कुछ ऐसे

आशीष तिवारी
Updated Thu, 25 Jul 2024 02:21 PM IST

सार

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है। लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम में अजित पवार की एनसीपी का जो रिजल्ट रहा उससे गठबंधन में अजित पवार को रखा जाए या ना रखा जाए इसको लेकर सवाल उठने लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अजित पवार - फोटो : ANI


दरअसल महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में अजित पवार की एनसीपी भी शामिल है। लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम में अजित पवार की एनसीपी का जो रिजल्ट रहा उससे गठबंधन में अजित पवार को रखा जाए या ना रखा जाए इसको लेकर सवाल उठने लगे। हालात ऐसे हो गए की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारकों ने भी अजित पवार के साथ भारतीय जनता पार्टी के हुए गठबंधन पर सवालिया निशान उठा दिए। सियासी जानकारों का भी मानना है कि इस वक्त जो परिस्थितियां बनी है उसमें अजित पवार के लिए कई तरह के समझौते करने पड़ सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात आने वाले विधानसभा के चुनाव में सीटों पर समझौते को लेकर कही जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी 160 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है उसमें अजित पवार की पार्टी के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।




दरअसल 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में अगर 160 से 170 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी चुनाव लड़ती है तो बची हुई 120 से 130 सीटों पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी को हिस्सेदारी मिलेगी। जबकि महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा इस बात की हो रही है कि अजित पवार और एकनाथ शिंदे की पार्टियां भी सौ सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा मामला आने वाले विधानसभा के चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर फंसता हुआ दिख रहा है। ऐसे ही सियासी पेंच को दूर करने के लिए अजित पवार की ओर से पार्टी की बैठको में चर्चाएं की जा रही है। हाल में ही अजित पवार ने एक बैठक के दौरान अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आने वाले निकाय चुनाव में उनकी पार्टी अकेले मैदान में उतरेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित पवार का निकाय चुनाव में अकेले लड़ने का फैसला विधानसभा के चुनावों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। दरअसल महाराष्ट्र में अजित पवार की पार्टी से 40 विधायक इस वक्त 


महाराष्ट्र की इसी सियासी उधेड़बुन के बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार दो दिन पहले दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई।राजनीतिक विश्लेषक सुमित चंद्रभाऊ वडवालकर कहते हैं कि महाराष्ट्र में इस मुलाकात के बाद कहा यह जाने लगा की सीटों के बंटवारे पर बहुत हद तक फैसला हो चुका है। क्योंकि अमित शाह से मुलाकात के बाद अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मिले थे। वडवालकर का कहना है कि सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह से पेंच फंसा है उससे यह बिल्कुल नहीं लगता है कि अजित पवार बहुत कम सीटों पर मानने वाले हैं। वह भी तब जब सियासी गलियारों में यह कहा जा रहा है कि अजित पवार से कम विधायकों वाले एकनाथ शिंदे की पार्टी को उनसे ज्यादा सीटें दी जा सकती है। वही अजित पवार की एनसीपी के कार्यकर्ता भी लगातार इस बात को लेकर दबाव बना रहे हैं कि उनकी पार्टी प्रदेश की बड़ी पार्टी है इसलिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ें।


दरअसल अजित पवार को लोकसभा चुनाव में दी गई सीटों के परिणाम पक्ष में नहीं आए। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चाएं भी हुईं। कहा यह तक गया कि महाराष्ट्र में अजित पवार के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के साथ समझौते में कोई सियासी लाभ नहीं हुआ। जबकि एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के सांसद भी ज्यादा बने। इसी गठबंधन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारको ने भी सवाल उठाए हैं। इन सवालों के बाद ही महाराष्ट्र की सियासत में कहा यह जा रहा है कि अगर आने वाले विधानसभा के चुनावों से पहले अजित पवार की पार्टी के कार्यकर्ताओं के मंशा अनुरूप समझौता नहीं होता है तो सियासी राहें भी अलग हो सकती है। जिस तरीके से निकाय चुनाव में एनसीपी ने अलग चुनाव लड़ने की बात कही है उससे बहुत कुछ स्पष्ट भी हो रहा है। हालांकि अजित पवार की ओर से आने वाले विधानसभा के चुनाव में मिल बैठकर सीटों के बंटवारे वाले फार्मूले पर लगातार चर्चाएं की जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next