प्रधानमंत्री की अपील पर जलाए गए थे दीये
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महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर रविवार की रात नौ बजे उन्होंने अपने घर की लाइट बंद नहीं की थी, जिस पर उन्हें और उनके परिवार को अभद्रता का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि लाइट बंद न करने पर उनके पड़ोसी ने उन्हें देशद्रोही कहा।
सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ प्रभुने ने यह वाकया ट्विटर पर साझा किया और कहा कि उनके परिवार ने लाइट इसलिए बंद नहीं की थी क्योंकि वह बीमार थे। उनकी पत्नी तृप्ति प्रभुने ने कहा कि उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं दर्ज कराई है क्योंकि सुरक्षा बल पहले ही लॉकडाउन लागू करवाने में जुटे हुए हैं।
सिद्धार्थ ने कहा, 'रविवार रात साढ़े आठ बजे वह अपने परिवार के साथ अपने घर की छत पर थे। नौ बजे लोगों ने लाइट बंद कर दीये और मोमबत्तियां जलानी शुरू कर दीं। हमारे घर की लाइट ऑन थीं क्योंकि मैं बीमार था। हमारी इमारत के सामने रहने वाले एक बिल्डर ने लाइट बंद करने को कहते हुए चीखना शुरू कर दिया।'
प्रभुने ने आरोप लगाया, 'फिर भी हम शांत रहे। इसके बाद वह नीचे आया और लोगों को जमा कर हमारे ऊपर चिल्लाने लगा।' अपने ट्वीट में सिद्धार्थ ने बिल्डर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने और उसके परिवार को देशद्रोही कहने और तीन महीने के लिए जेल भेजने की धमकी देने का आरोप भी लगाया।
सिद्धार्थ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नौ बजे नौ मिनट के लिए लाइट बंद करने की अपील वैकल्पिक थी, और इस तरह का व्यवहार गलत है। वहीं, तृप्ति ने कहा कि बिल्डर का व्यवहार ठीक नहीं था, लेकिन हम मामले को तूल नहीं देना चाहते। उन्हें इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।