महाराष्ट्र के मंत्री तानाजी सावंत ने सोमवार को मराठा समुदाय के लिए आरक्षण पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके मराठा समूहों और विपक्षी दलों की नाराजगी झेली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मई में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण देने वाले महाराष्ट्र कानून को असंवैधानिक करार दिया था और कहा था कि 1992 द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को तोड़ने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी।
एक कार्यक्रम में सावंत ने कहा कि दो साल तक (मराठा) आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद कुछ भी नहीं हुआ। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद आरक्षण के लिए एक खुजली है। मैं इसे चाहता हूं और मेरी अगली पीढ़ी इसे चाहती है। हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक हम इसे (आरक्षण) नहीं देते। शिवसेना के शिंदे धड़े का हिस्सा सावंत ने कहा कि हमारे नेता एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस हमारी मांग के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित करेंगे। वे तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक कि आरक्षण नहीं दिया जाता।
तानाजी सावंत आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय के हालिया विरोध का जिक्र कर रहे थे। उनकी टिप्पणी पर मराठा समुदाय के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी कड़ी प्रतिक्रिया हुई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि बयान आपत्तिजनक और गैर जिम्मेदाराना है और सावंत को बर्खास्त करने की मांग की। सावंत ने जो कहा था उस पर पटोले ने शिंदे और फडणवीस से जवाब मांग। आलोचनाओं के बीच सावंत ने बाद में माफी मांगी और कहा कि उनका मराठा समुदाय की भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था।
इस मुद्दे पर बोलते हुए महाराष्ट्र के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि 2014 और 2019 के बीच फडणवीस सरकार ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। इसे उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा। हालांकि, तत्कालीन (महा विकास अघाड़ी) सरकार सुप्रीम कोर्ट में केस हार गई। पाटिल ने कहा कि आपने (एमवीए सरकार) पिछले ढाई साल में कुछ क्यों नहीं किया? हम भी आपका समर्थन करते। तानाजी सावंत का यही मतलब था।