महाराष्ट्र सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण के लिए अपना कार्यक्रम तैयार कर लिया है। सरकार छह महीनों में 3.25 करोड़ लोगों को तीन चरणों में वैक्सीन देने की तैयारी कर रही है। जिन लोगों को वैक्सीन दिए जाएंगे उनमें स्वास्थ्य कार्यकर्ता, अग्रिम पंक्ति में खड़े कार्यकर्ता और 50 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक और अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोग शामिल हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि टीके मुफ्त होंगे या लोगों को इसके लिए पैसे देने होंगे।
टीकाकरण अभियान व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा, लोगों को एक निर्दिष्ट वेबसाइट पर पंजीकरण करना होगा और उन्हें एक विशिष्ट तारीख और समय पर टीकाकरण शिविर में पेश होने के लिए कहा जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सारा काम सहजता से निपट जाए।
पहले चरण में राज्य में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कोविड-19 का टीका लगाएगी। दूसरे चरण में फ्रंटलाइन वर्कर्स (पुलिस, फायर ब्रिगेड, कंजरवेंसी स्टाफ आदि सहित) का टीकाकरण किया जाएगा। तीसरे चरण में उन नागरिकों का टीकाकरण किया जाएगा जो 50 साल से ज्यादा आयु के हैं और अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों का पंजीकरण पहले ही शुरू हो चुका है।
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अधिकारी ने कहा, 'केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद, हमने टीकाकरण अभियान के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है, यह मानते हुए कि टीका जनवरी से उपलब्ध हो जाएगा। यह अभियान जिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित किया जाएगा। चार से पांच लोगों की एक टीम टीकाकरण अभियान का संचालन करेगी और उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू हो गया है।'
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'प्रत्येक व्यक्ति को निर्दिष्ट वेबसाइट पर टीका लगवाने के लिए पंजीकरण करना होगा। उसे टेक्स्ट मैसेज भेजकर बुलाया जाएगा। उन्हें अपने पहचान पत्र के साथ एक विशिष्ट तिथि और समय पर आने के लिए कहा जाएगा। शिविर में मौजूद लोग उनके पंजीकरण और पहचान की जांच करेंगे टीका लगाने के बाद उस व्यक्ति को कम से कम आधे घंटे तक निगरानी में रखा जाएगा। यदि कोई जटिलता (कॉम्प्लीकेशन) नहीं होती है, तो व्यक्ति को जाने की अनुमति दी जाएगी अन्यथा उसका आगे का उपचार किया जाएगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमें अभी भी नहीं पता है कि क्या टीकाकरण सभी के लिए मुफ्त होगा या लोगों को इसके लिए भुगतान करना होगा। यह फैसला केंद्र को लेना है।' अधिकारी ने आगे कहा कि राज्य के स्वास्थ्य कर्मचारियों ने 2018 में केवल दो साल पहले ही खसरा-रूबेला के लिए एक टीकाकरण अभियान पूरा किया है।