महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के 12 मनोनीत सदस्यों की सूची को मंजूरी देने में देरी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि राज्यपाल तय समय के भीतर विधान परिषद के सदस्यों के नामांकन पर निर्णय लेने के लिए बाध्य थे, लेकिन इसमें राज्यपाल ने देरी की।
महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के 12 मनोनीत सदस्यों की सूची को मंजूरी देने में देरी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। इसी बीच महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। राज्यपाल और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बीच हुई मुलाकात को राजभवन ने 'शिष्टाचार भेंट' बताया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि राज्यपाल उचित समय के भीतर विधान परिषद के सदस्यों के नामांकन पर निर्णय लेने के लिए बाध्य थे। शुक्रवार (13 अगस्त) को बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आठ महीने पर्याप्त समय था और उम्मीद थी कि मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा, लेकिन राज्यपाल की ओर से इसमें देरी हुई।
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हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत अदालत इस मामले में राज्यपाल को कोई निर्देश नहीं दे सकती। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि उचित समय के भीतर नामांकन के लिए मुख्यमंत्री को उनके आरक्षण के बारे में सूचित करना राज्यपाल का कर्तव्य था, ऐसा न करने पर वैधानिक मंशा विफल हो जाएगी।