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मद्रास हाईकोर्ट: हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने में क्या मुश्किल, अदालत ने संस्थानों से मांगा आठ सप्ताह में जवाब

Wed, 26 Jan 2022 01:38 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, चेन्नई।

सार

जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित संस्थाओं को नोटिस देते हुए आठ सप्ताह के अंदर इसका जवाब देने को कहा है।
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मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : PTI
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदी को बतौर तीसरी भाषा पाठ्यक्रम में शामिल करने में क्या मुश्किल है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी को हिंदी नहीं आती है तो उत्तर भारत में उसके लिए नौकरी हासिल करना बेहद मुश्किल हो सकता है। अदालत ने संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

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कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति पीडी औदिकेसवालु की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आश्चर्य जताते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही तमिल और अंग्रेजी सिखाई जा रही है, यदि इसी के साथ हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल कर लिया जाए तो इसमें क्या मुश्किल हो सकती है। जनहित याचिका, केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 को लागू कराने के विषय को लेकर दायर की गई थी। याचिकाकर्ता अर्जुनन इलायाराजा की याचिका में तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति को लागू करने के संबंध में अदालत से दिशा निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। 

महाधिवक्ता आर शनमुगासुंदरम ने राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य में हर व्यक्ति हिंदी सीखने के लिए स्वतंत्र है। हिंदी प्रचारिणी सभा जैसी कुछ संस्थाओं से कोई भी हिंदी सीख सकता है। इस पर कार्यकारी न्यायाधीश ने कहा कि ‘सीखना’ और ‘शिक्षण’ में अंतर है।  
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जब महाधिवक्ता आर षणमुगम ने कहा कि राज्य दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) नीति का पालन करता है, तो कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि हिंदी को बतौर तीसरी भाषा के विकल्प रूप में पढ़ाया जाए तो इसमें क्या मुश्किल है। जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित संस्थाओं को नोटिस देते हुए आठ सप्ताह के अंदर इसका जवाब देने को कहा है।

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