केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी सरकार और उप राज्यपाल किरण बेदी के बीच गतिरोध की कई खबरे सामने आती रहती हैं। अब इसपर हस्तक्षेप करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला आया है। फैसले में अदालत का कहना है कि बेदी के पास केंद्र शासित प्रदेश की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की शक्ति नहीं है। अदालत की बेंच ने केंद्रीय मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों को खारिज कर दिया। जिसमें उपराज्यपाल को पुडुचेरी सरकार की रोजाना की गतिविधियों में हस्तक्षेप करने और सरकार से संबंधित फाइलों की तलाश करने का अधिकार दिया था।
अदालत के इस आदेश के बाद उप राज्यपाल अब पुडुचेरी सरकार से किसी भी फाइल के बारे में नहीं पूछ सकती हैं। केवल इतना ही नहीं वह न तो सरकार को और न ही सरकार की तरफ से कोई आदेश जारी कर सकती हैं।
धरने पर बैठे थे मुख्यमंत्री
फरवरी के महीने में पुडुचेरी के मुखियमंत्री वी नारायणसामी उपराज्यापल के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। उन्होंने बेदी पर राज्य के कार्यों में गतिरोध पैदा करने का आरोप लगाया था। नारायणसामी के अनुसार, उनकी योजनाओं और प्रशासनिक आदेशों को बेदी से मंजूरी नहीं मिलने के विरोध में वह धरने पर बैठे थे। उन्होंने सात फरवरी को बेदी को पत्र लिखकर अपनी मांगों एवं मुद्दों का जिक्र किया था। इस दौरान नारायणसामी कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों के साथ राजभवन के बाहर सो गए थे।
नारायणसामी ने बेदी पर लगाया था आरोप
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने किरण बेदी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने हमारी मुफ्त चावल योजना को खारिज करके फाइल वापस कर दी। वह कौन हैं? वह चुनी हुई सरकार की नातियों पर रोक नहीं लगा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सात फरवरी को खत लिखकर 36 चार्टर डिमांड्स को पूरा करने की मांग की थी मगर उन्हें बेदी का जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया था कि जब से बेदी उपराज्यपाल बनी हैं तभी से वह सरकार के विकासकार्यों में बाधा पहुंचा रही हैं।