फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मद्रास हाईकोर्ट ने किया प्रहार: वीआईपी केवल भगवान, मंदिर में भक्तों को परेशान करना पाप

Wed, 23 Mar 2022 09:38 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मदुरै (तमिलनाडु)

सार

न्यायाधीश ने कहा कि भक्त अपने धार्मिक विश्वास के कारण भगवान से प्रार्थना करने आते हैं। उनके बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। वीआईपी भी मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं तो भक्त के रूप में ही।
विज्ञापन
court demo - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मद्रास हाईकोर्ट ने मंदिरों में बढ़ती वीआईपी दर्शन संस्कृति पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि वीआईपी केवल भगवान हैं। कोई वीआईपी भक्तों की परेशानी का कारण बनता है तो वह पाप कर रहा है। उसे भगवान माफ नहीं करेगा। विभिन्न सरकारी विभागों के वीआईपी श्रेणी में आने वाले अधिकारियों, उनके साथ आने वालों, अन्य भक्तों या दानदाताओं को मंदिर में अलग लाइन लगाकर विशेष दर्शन की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। 

विज्ञापन


तूतीकोरिन जिले में तिरुचेंदुर के प्रसिद्ध अरुलमिगु सुब्रमनिया स्वामी मंदिर से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि वीआईपी संस्कृति से, खासकर मंदिरों में, लोग परेशान हो चुके हैं। वीआईपी प्रवेश की सुविधा केवल संबंधित व्यक्ति अथवा उसके परिजनों को ही मिलनी चाहिए, रिश्तेदारों को नहीं। इसमें कोई संदेह नहीं कि कुछ लोगों को विशेष दर्शन की सुविधा दी जा सकती है। हालांकि यह भी केवल उन लोगों के लिए है, जो विशेष पदों पर हैं। यह उनके पद के लिए है, व्यक्तिगत रूप से नहीं। ज्यादातर विकसित देशों में केवल उच्च पदों के कुछ लोगों को अभिरक्षा दी जाती है, जिन्हें संविधान में गणमान्य माना गया है। बाकी को अपनी सुरक्षा का खुद इंतजाम करना होता है। इस तरह की विशेष सुविधा लोगों के समानता के अधिकार के आड़े नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे स्थान पर वीआईपी के विशेष दर्शन के कारण भक्त परेशान होते हैं और व्यवस्था को कोसते हैं। मंदिर प्रशासन का काम है कि वीआईपी दर्शन की व्यवस्था इस प्रकार करे कि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। तमिलनाडु सरकार वीआईपी की लिस्ट अधिसूचित कर चुकी है। वीआईपी के साथ सुरक्षा गार्ड और स्टाफ भी होते हैं। यह ध्यान रखा जाए कि वीआईपी के साथ उनके स्टाफ को वीआईपी दर्शन की सुविधा न मिले। स्टाफ को केवल शुल्क वाली अथवा सामान्य लाइनों में दर्शन की अनुमति हो।
विज्ञापन


वीआईपी भी भक्त के रूप में ही करता है दर्शन
न्यायाधीश ने कहा कि भक्त अपने धार्मिक विश्वास के कारण भगवान से प्रार्थना करने आते हैं। उनके बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। वीआईपी भी मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं तो भक्त के रूप में ही।

विज्ञापन

एलआईसी अधिनियम में बदलाव सांविधानिक रूप से गलत नहीं, लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय ही मान्य : कोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में सरकार का हिस्सा बेचने के लिए वित्त विधेयक एवं बीमा कंपनी के अधिनियम में किए बदलावों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी व न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती की पीठ ने एल पोनम्मल की जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा, आईपीओ लाने के लिए एलआईसी अधिनियम में धन विधेयक के जरिये किए गए बदलाव असांविधानिकनहीं हैं। 

बीमा कंपनी की पॉलिसीधारक पोनम्मल ने याचिका में कहा था कि एलआईसी में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए अधिनियम में बदलाव करने के लिए धन विधेयक का गलत तरीका अपनाया गया था। संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक लाकर नियमों में बदलाव किए गए, जबकि यह धन विधेयक की परिभाषा में ही नहीं आता है। पीठ ने कहा, इस बारे में लाए विधेयक को धन विधेयक के रूप में पेश करने की दी गई लोकसभा अध्यक्ष की स्वीकृति को चुनौती नहीं दे सकते। उनका निर्णय ही अंतिम रूप से मान्य होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें