अदालत ने कहा कि राज्य भर में परिवहन निगमों द्वारा हजारों बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार भी बार-बार निगम कर्मियों को दयनीय आर्थिक स्थिति से उबारने के लिए कई करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने के लिए आगे आती है, फिर भी उनकी दयनीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
अब तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बढ़ा हुआ डीए मिल सकेगा। मद्रास उच्च न्यायालय ने इस बाबत तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम कर्मचारी पेंशन कोष ट्रस्ट के प्रशासक को निर्देशित किया है। हाई कोर्ट ने राज्य परिवहन निगमों के 86,000 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते का भुगतान इस साल नवंबर से संभावित रूप से करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने कहा कि राज्य भर में परिवहन निगमों द्वारा हजारों बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार भी बार-बार निगम कर्मियों को दयनीय आर्थिक स्थिति से उबारने के लिए कई करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने के लिए आगे आती है, फिर भी उनकी दयनीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
न्यायाधीश जे सत्य नारायण प्रसाद ने हाल ही में राज्य परिवहन एवं परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संघ की ओर से अवमानना याचिका के बाद दाखिल उप-आवेदन का निपटारा करते हुए ये निर्देश दिया। इसमें राज्य परिवहन एवं परिवहन निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण संघ ने मामले को फिर से खोलने की मांग की, जिसे 2014 में दायर किया गया था।
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मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जे सत्य नारायण प्रसाद ने जब अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा कि क्या अन्य विभागों के कर्मचारियों को डीए का भुगतान किया जा रहा है, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि एएजी द्वारा दिए गए जवाब में ऐसा कोई तर्क नहीं दिया गया है जिसके आधार पर किसी भी परिस्थिति में निगम के कर्मचारियों को डीए का भुगतान ना करना उचित ठहराया जाए। ऐसे में इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि भेदभाव का स्पष्ट मामला है और जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि राज्य परिवहन निगमों के पेंशनभोगियों के साथ बढ़े हुए डीए के भुगतान के संबंध में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय का विचार है कि वित्तीय संकट पेंशनभोगियों को बढ़े हुए डीए से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु में राज्य परिवहन निगम की तुलना में अन्य विभागों में कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। निगम में 66,000 पेंशनभोगी और 20,000 पारिवारिक पेंशनभोगी हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा किया जाने वाला मासिक टर्मिनल खर्च लगभग 81 करोड़ रुपये होगा।