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MP: आरएसएस की नर्सरी में राहुल की भारत जोड़ो यात्रा, शिव-नर्मदा और डॉ. आंबेडकर के सहारे 2023 और 2024 पर नजर

Mon, 28 Nov 2022 06:12 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दक्षिण भारत में 2 हजार किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद राहुल गांधी की यात्रा ने 23 नवंबर को एमपी में प्रवेश किया। बुरहानपुर होते हुए यह यात्रा मालवा निमाड़ के 6 जिलो के 14 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। इस पूरे क्षेत्र में 66 विधानसभा सीटे आती है।
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राहुल गांधी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा दक्षिण के राज्यों से होते हिंदी पट्टी के सबसे अहम राज्य मध्य प्रदेश पहुंच चुकी हैं। राहुल की यह यात्रा भाजपा—आरएसएस के गढ़ कहे जाने वाले मालवा—निमाड़ से होकर गुजर रही है। 2018 में कांग्रेस ने बीजेपी के इस गढ़ को भेदकर अपनी सरकार बनाई थी। 15 महीनों में ही कमलनाथ की सरकार गिर गई और बीजेपी सत्ता में वापस आ गई। कांग्रेस की नजर एक बार फिर से इन्हीं क्षेत्रों पर ही हैं। पार्टी को उम्मीद है कि राहुल की इस यात्रा से जमीनी संगठन मजबूत होगा वहीं कार्यकर्ताओं का भी मनोबल बढ़ेगा। जिसका 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिल सकता है।

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दक्षिण भारत में 2 हजार किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद राहुल गांधी की यात्रा ने 23 नवंबर को एमपी में प्रवेश किया। बुरहानपुर होते हुए यह यात्रा मालवा निमाड़ के 6 जिलो के 14 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। इस पूरे क्षेत्र में 66 विधानसभा सीटे आती है। इसमें 22 अनुसूचित जनजाति और 9 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 29 और कांग्रेस को 34 सीटे हासिल हई थी। इससे पहले के तीन विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस से ज्यादा सीट हासिल की थी। अब कांग्रेस की कोशिश है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में अपना पुराना प्रदर्शन दोहरा सके।

एमपी में राहुल गांधी की यात्रा में भौगोलिक स्थितियों के साथ-साथ सूबे की सियासत में मालवा निमाड़ की अहमियत का खासा ध्यान रखा गया है। यह क्षेत्र संघ की नर्सरी के तौर पर भी जाना जाता है। कांग्रेस इस यात्रा के जरिए प्रदेश में समाज के हर वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसके लिए उसने प्रतीकों को चुना है। चाहे वह, राहुल गांधी का टंट्या भील के गांव में जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देना हो या फिर संविधान दिवस के मौके पर संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर की जन्म स्थली महू में जाकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके स्मारक का दर्शन करना। मध्य प्रदेश में आदिवासी तबके की अच्छी खासी आबादी है। मालवा निमाड़ के अलावा छिंदवाड़ा, रतलाम, झाबुआ जैसे इलाकों में इनकी खासी मौजूदगी है। आदिवासियों में भीलों की संख्या और प्रभाव दोनों है। ऐसे में टंट्या भील के प्रति राहुल का सम्मान उस तबके तक पहुंचने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उनके पारंपरिक हथियार धनुष को चलाया है।
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इसके अलावा महू में आंबेडकर के जरिए सूबे के दलित समुदाय को साधने की कवायद के रूप में देखा जा सकता है। इंदौर में भी देवी अहिल्या की प्रतिमा पहुंचकर मराठी मतदाताओं को साधने की कोशिश की है। राहुल ओंकारेश्वर और उज्जैन के महाकालेश्वर के दर्शन कर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की झलक देने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, यह दोनों ही मंदिर शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। वहीं, उज्जैन में राहुल गांधी एक बड़ी रैली भी करने जा रहे हैं। करीब एक माह पहले महाकाल लोक के लोकार्पण के दौरान पीएम मोदी भी यहां बड़ी रैली कर चुके है।

13 दिन में 400 किमी का सफर करेंगे तय
राहुल गांधी मध्यप्रदेश में करीब 13 दिन अपनी यात्रा करेंगे। इस दौरान वो करीब 400 किमी का सफर तय करते हुए राजस्थान में प्रवेश करेंगे। राहुल गांधी की इस यात्रा के दौरान करीब 6 लोकसभा सीटों पर भी जाएंगे। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट को छोड़कर सभी सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। इसके अलावा करीब 25 विधानसभा सीट को भी यह यात्रा कवर कर रही है। जिन सीटों से ये यात्रा जाएगी अभी वहां 15 सीट पर बीजेपी और 10 पर कांग्रेस के विधायक हैं। खंडवा जिले की चारों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। बुरहानपुर में एक सीट पर बीजेपी और एक निर्दलीय है। खरगोन जिले की सभी 5 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस विधायक हैं। इंदौर की 9 विधानसभा सीटों में से 6 बीजेपी और 3 कांग्रेस के विधायक हैं। उज्जैन जिले में 4 सीटों पर कांग्रेस और तीन विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है।

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