मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान अवैध लेन-देन की जांच शुरू हो गई है। राज्य के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में पीई दर्ज कर ली है।
बता दें, कि हाल ही में चुनाव आयोग ने राज्य निर्वाचन आयोग को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की एक रिपोर्ट भेजी थी। इसमें लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान राज्य में कालेधन का बड़ा पैमाने पर इस्तेमाल होने की बात कही गई है। इसके साथ ही आयोग ने इस मामले में आपराधिक कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके बाद गुरुवार को ईओडब्ल्यू ने प्राइमरी इन्क्वाॅयरी दर्ज की है।
तीन आईपीएस अधिकारी घेरे में
लोकसभा चुनाव के वक्त मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार थी। आयकर छापों के दौरान कमलनाथ के करीबी के घर से भी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की थी। चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को तीन आईपीएस अधिकारियों व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। आयोग का दावा है कि इन अधिकारियों ने 2019 के आम चुनावों में इस कालेधन का इस्तेमाल करने में मदद की थी।
चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह सचिव और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से इन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने को भी कहा है। सीबीडीटी की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता का दावा किया गया था। आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी सीबीडीटी की रिपोर्ट भेजी है। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने आईपीएस अधिकारी सुशोवन बनर्जी, संजय माने, वी मधु कुमार और राज्य पुलिस के अधिकारी अरुण मिश्रा के खिलाफ याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है।
आयकर विभाग ने अप्रैल में कमलनाथ के पूर्व एसओडी प्रवीण कक्कर, सलाहकार राजेंद्र मिगलानी और अश्वनी शर्मा के मध्यप्रदेश और दिल्ली स्थित 52 ठिकानों पर छापा मारकर 14.6 करोड़ रुपये कालाधन पकड़ा था।