मध्य प्रदेश के चार निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रबंधन कोटे के तहत कथित तौर पर भारी रकम देकर दाखिला लेने वाले 200 से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है। व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) मामले की सीबीआई जांच में इन छात्रों के चयन में अनियमितताओं का दावा किया गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर इन उम्मीदवारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है जो मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए किसी प्रवेश परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए। प्रमोटरों में भोपाल स्थित, एलएन मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन जेएन चौकसे, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज केएसएन विजयवर्गीय, चिरायु मेडिकल कॉलेज के अजय गोयनका और इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश सिंह भदौरिया शामिल हैं।
पढ़ें- व्यापम पीएमटी-2012 घोटाला: 592 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश, व्यापम के 4 पूर्व अधिकारी भी शामिल
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर प्रबंधन कोटे के तहत इन चार कॉलेजों में कुल 229 दाखिले हुए। इसके लिए छात्रों से प्रति सीट 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक वसूले गए। ये दाखिले मेडिकल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और बिचौलियों की कथित भागीदारी से हुए। अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई का यह कदम कदम व्यापमं के तहत साल 2012 की पीएमटी, जांच पर आधारित है।