कोरोना और मंकीपॉक्स के साथ एनआईवी वैज्ञानिकों ने लंपी वायरस को लेकर भी जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस की सीक्वेंस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके जरिये वायरस के विभिन्न स्ट्रेन में आ रहे बदलावों पर नजर रखी जा सकती है।
राजस्थान के बाद अब महाराष्ट्र ने भी लंपी वायरस को लेकर जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू कर दी है, लेकिन बाकी राज्यों का इस पर कोई ध्यान नहीं है। राजस्थान के हर जिले से सैंपल लेकर दिल्ली स्थित आईजीआईबी भेजे गए हैं।
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वहीं, महाराष्ट्र के सभी सैंपल पुणे स्थित एनआईवी प्रयोगशाला भेजे गए हैं। कोरोना और मंकीपॉक्स के साथ एनआईवी वैज्ञानिकों ने लंपी वायरस को लेकर भी जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस की सीक्वेंस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके जरिये वायरस के विभिन्न स्ट्रेन में आ रहे बदलावों पर नजर रखी जा सकती है।
एनआईवी की एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि लंपी वायरस को लेकर उनके यहां हाल ही में महाराष्ट्र के दो जिलों से सैंपल जांच के लिए पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली या फिर अन्य किसी राज्य से उनके यहां सैंपल नहीं आया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के वायरस में जीनोम सीक्वेंसिंग की भूमिका अहम होती है। निगरानी के तौर पर हम इसका इस्तेमाल करते हैं तो एक बड़ी आपदा से बच सकते हैं।
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अब तक एक लाख से ज्यादा गायों की मौत
देश में अब तक लंपी वायरस की वजह से एक लाख से भी अधिक गायों की मौत हुई है। इसके चलते अनुमानित तौर पर अब तक 300 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हुआ है। इस साल जनवरी माह में द वेटरनरी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार लंपी वायरस एशियाई देशों में भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
इसकी वजह से प्रत्यक्ष पशुधन और उत्पादन हानि 1000 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।