रक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक पेंढारकर ने 1990 में असम रेजीमेंट से कमीशन प्राप्त करने के बाद 34 साल के सेवाकाल में अलग-अलग कमांड और स्टाफ के पदों पर काम किया है। वे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान और एलओसी पर कमांडिंग फॉरमेशन में भी शामिल रहे।
भारतीय सेना के स्पीयर कोर प्रमुख का कार्यभार शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत एस पेंढारकर ने संभाला। उन्होंने महू आर्मी वॉर कॉलेज के कमांडेंट बने लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही की जगह ली। पेंढारकर के सामने मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष को दूर करने की चुनौती होगी।
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रक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक पेंढारकर ने 1990 में असम रेजीमेंट से कमीशन प्राप्त करने के बाद 34 साल के सेवाकाल में अलग-अलग कमांड और स्टाफ के पदों पर काम किया है। वे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान और एलओसी पर कमांडिंग फॉरमेशन में भी शामिल रहे। स्पीयर कोर प्रमुख बनने से पहले पेंढारकर प्रादेशिक सेना में महानिदेशक थे। उनको अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक और कई प्रशंसा पुरस्कारों मिल चुके हैं।
अधिकारियों के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल पेंढारकर ने रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य संचालन निदेशालय में भी काम किया है। लेफ्टिनेंट जनरल पेंढारकर भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने अपनी सेवा के दौरान डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन में स्टाफ कोर्स, आर्मी वॉर कॉलेज महू में हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कोर्स में भाग लिया
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बता दें कि भारतीय सेना की सबसे बड़ी स्पीयर कोर मणिपुर समेत पूर्वोत्तर क्षेत्र के अधिकांश क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा शुरू हुई। इसमें अब तक 200 लोगों की जान जा चुकी है। अब पेंढारकर के सामने इस हिंसा के निपटने की चुनौती होगी।
साही ने उत्तरी सीमाओं को किया था मजबूत
अब तक स्पीयर कोर का कार्यभार संभाल रहे लेफ्टिनेंट जनरल साही अब महू में आर्मी वॉर कॉलेज में इसके कमांडेंट के रूप में स्थानांतरित हो गए हैं। भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ-साथ म्यांमार और बांग्लादेश के साथ सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनका नेतृत्व महत्वपूर्ण था।