नरेंद्र मोदी के भाषण की बड़ी बातें
- फोटो : PTI
भाजपा की पारंपरिक सीट गुजरात के गांधीनगर से रिकॉर्ड जीत दर्ज करने वाले अमित शाह को अगर गृह मंत्री बनाया जाता है तो पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी खाली होगी। ऐसे में भाजपा का अध्यक्ष कौन होगा, इसको लेकर भी सियासी चर्चा जोरों पर है। भाजपा की शानदार जीत के बाद भाजपा मुख्यालय में जीत के जश्न के दौरान पीएम मोदी और शाह के साथ राजनाथ सिंह तो थे ही, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी मंच साझा करते दिखे थे। ऐसे में एक चर्चा जेपी नड्डा को यह अहम जिम्मेदारी दिए जाने की भी है। वहीं पार्टी की कमान सौंपे जाने को लेकर दूसरी चर्चा नितिन गडकरी के नाम की भी है।
सुषमा स्वराज मंत्रालय छोड़ेंगी तो कौन होगा विदेश मंत्री?
अटल सरकार में भी कद्दावर नेत्री रहीं और फिर मोदी सरकार में भी अहम नेत्री रहीं सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री के तौर पर शानदार परफॉर्मेंस करने वालों में रही हैं। उनकी उम्र भी हो चली है और उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता। विदेश मंत्री के तौर पर विदेश की यात्राओं के दौरान उनका स्वास्थ्य उनके काम के आड़े आता रहता है। ऐसे में सुषमा के विदेश मंत्रालय छोड़ने पर कोई ताज्जुब नहीं होगा।
पिछले पांच सालों में हर मोर्चे पर सफलता का दावा करने वाली मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर न केवल विपक्ष के, बल्कि अर्थशास्त्रियों और आलोचकों के भी निशाने पर रही है। ऐसे में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी और बढ़ेगी। अरुण जेटली एक समय 'योग्य' रहे हों, लेकिन पिछले लंबे समय से उनका स्वास्थ्य बहुत ठीक नहीं रहता है। जेटली का जब इलाज चल रहा था तो पीयूष गोयल वित्त मंत्रालय का काम संभाल रहे थे। मोदी सरकार के अंतरिम बजट के दौरान उन्होंने ही वित्त मंत्री की भूमिका निभाई। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि गोयल को वित्त मंत्रालय सौंपा जाए और जेटली के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें राज्यमंत्री बना दिया जाए या फिर कोई हल्का मंत्रालय दिया जाए।
नरेंद्र मोदी-नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होंगे। ऐसे में मोदी कैबिनेट में इन राज्यों के जीते सांसदों को प्राथमिकता दी जा सकती है। साल 2022 में उत्तर प्रदेश में भी चुनाव होंगे। ऐसे में कैबिनेट में यहां से भी बड़े नाम शामिल हो सकते हैं।
लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा को बड़ी सफलता मिली है। यहां जिन नेताओं ने जीत की नींव रखी है, उनमें से भी कुछ चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। यहां भी साल 2021 में विधानसभा चुनाव होंगे।
मंत्रिमंडल में शामिल होंगी सहयोगी पार्टियां भी!
भाजपा यूं तो पूर्ण बहुमत में है, लेकिन चुनाव से पहले अपने सहयोगी दलों से गठबंधन करने के बाद वह अब किनारा नहीं करेगी। गठबंधन धर्म के तहत सहयोगी पार्टियों से भी नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। बिहार और महाराष्ट्र की बात करें तो जदयू और शिवसेना को बड़ी कामयाबी मिली है। ऐसे में मोदी ब्रिगेड में मंत्री के तौर पर नए चेहरे शामिल हो सकते हैं।