हरियाणा के चार युवकों ने सेना के फर्जी नियुक्तिपत्र से जाट रेजीमेंट सेंटर तक घुसपैठ कर ली और 12 दिन तक यहां ट्रेनिंग भी ली। इससे सेना के भर्ती सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। अहम सवाल उठने लगा है कि ऐसे तो सेना के अहम स्थलों की सूचनाएं जुटाने के लिए कोई आतंकी भी इस सिस्टम को भेद सकता है। सेना का खुफिया तंत्र भी इस मामले के बाद से अलर्ट हो गया है।
सूत्रों का कहना है कि अब सेना यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं इन युवाओं के पीछे कोई शातिर दिमाग तो नहीं है। कुछ महीने पहले ही बरेली के सैन्य ठिकानों की गोपनीय सूचनाएं जुटाने वाला आईएसआई एजेंट इजाज पकड़ा गया था। उसके बारे में पता लगा था कि उसने यहां के सैन्य ठिकानों की कई जानकारियां जुटा ली थीं। वह तो कुछ लोगों की मिलीभगत से सैन्य स्थलों तक घुसपैठ कर पाया लेकिन खुद को हरियाणा का निवासी बताने वाले चार युवक सेना के भर्ती सिस्टम को भेदकर जाट रेजीमेंट सेंटर तक पहुंच पाने में कामयाब रहे।
सामने आई जानकारी के मुताबिक, चारों युवाओं ने किसी दलाल के जरिए दिल्ली के सेना भर्ती कार्यालय के फर्जी नियुक्तिपत्र हासिल किए और एक जुलाई को यहां जाट रेजीमेंट सेंटर में पहुंच गए, तब से 12 जुलाई तक वह यहां रहकर सैनिक बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। पूरे 12 दिन वह यहां रहे। हालांकि सेना के अफसर इनको महज बेरोजगार युवक मानकर की गई उनकी हरकत के रूप में इस मामले को देख रहे हैं लेकिन जिस साहस और हिम्मत से चारों ने सेना के कैंप में डेढ़ हफ्ते से ज्यादा समय तक घुसपैठ की, उससे कई आशंकाएं प्रबल हो रही हैं।