लोकसभा में हंगामें के बीच सरोगेसी (विनियमन) विधेयक पारित कर दिया गया। इसके पास होने के साथ ही अब देश में व्यवसायिक सरोगेसी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।खास बात ये कि यह बिल सदन में 2016 से ही लंबित पड़ा था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इस बिल के पास होने के बाद कहा कि सभी सांसदों ने महिला और उसके बच्चे की गरिमा का ध्यान रखने के लिए कानून का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक सरोगेसी से कई तरह की समस्यायें सामने आ रही थी इस लिए इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के लिए यह बिल लागा गया ।
लॉ कमीशन और सुप्रीम कोर्ट की राय भी इससे मिलती थी इसलिए इस कानून को पास किया गया। वही इस कानून के आने से किसी परिवार में बच्चा न होने पर आधुनिक विज्ञान के इस्तेमाल से वारिस न मिल सके इसका भी ध्यान रखा गया है।यानि कानून का पालन करते हुए नि:संतान दंपत्ति सरोगेसी के तहत बच्चा कर सकेंगे।
इस बिल की खास बात जेपी नड्डा ने बताई कि जो भी सरोगेसी के विकल्प को चुनना चाहते हैं उन्हें इनफर्टिलिटी का सर्टिफिकेट 90 दिनों के भीतर देना होगा।