नियमों के मुताबिक लोकपाल का एक अध्यक्ष व आठ सदस्य हो सकते हें, जिनमें सदस्य न्यायिक होने चाहिए, लेकिन पिछले दो वर्ष से न्यायिक सदस्यों के भी दो पद रिक्त हैं।
लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में जांच-पड़ताल के लिए स्थापित लोकपाल 27 मई से बिना अध्यक्ष के ही चल रहा है। अध्यक्ष के तौर पर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष का कार्यकाल पूरा होने के बाद से लोकपाल के न्यायिक सदस्य जस्टिस प्रदीप मोहंती फिलहाल अध्यक्ष का अतिरिक्त भार संभाल रहे हैं।
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वहीं, नियमों के मुताबिक लोकपाल का एक अध्यक्ष व आठ सदस्य हो सकते हें, जिनमें सदस्य न्यायिक होने चाहिए, लेकिन पिछले दो वर्ष से न्यायिक सदस्यों के भी दो पद रिक्त हैं। इतना ही नहीं लोकपाल की स्थापना के बाद से अबतक भ्रष्टाचार के किसी भी आरोपी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी है।
जांच रिपोर्ट तैयार करने का काम अनुसंधान निदेशक का अभियोजन निदेशक, लोकपाल के निर्देश दिए जाने के बाद विशेष अदालत के समक्ष जांच रिपोर्ट के साथ मामला दर्ज करेगा। वहीं, जांच रिपोर्ट तैयार करने का काम अनुसंधान निदेशक का है। दोनों के नहीं होने पर लोकपाल यह काम सीबीआई व सीवीसी अफसरों से करा रहा है।
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1,719 में से सिर्फ 136 शिकायतों की जांच
इस साल मिली भ्रष्टाचार की 1,719 शिकायतों में से सिर्फ 136 की जांच की जा रही है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में बताया कि 21 अगस्त तक 134 शिकायतें ही निर्धारित प्रारूप में मिली थीं।
जांच और अभियोजन शाखाएं स्थापित नहीं हुईं
लोकपाल व लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के मुताबिक लोकपाल अध्यक्ष को निदेशकों के अधीन अभियोजन व अनुसंधान शाखाएं गठित करने का निर्देश है। ये निदेशक ऐसे व्यक्ति होने चाहिए, जो पदानुक्रम में सरकार के अतिरिक्त सचिव पद के समतुल्य या उच्च अधिकारी हों। लोकपाल अध्यक्ष इन निदेशकों को सरकार के सुझाए पैनल में से नियुक्त कर सकता है।