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संसद Live: लोकसभा में गूंजा कर्नाटक मुद्दा, थरूर ने उठाया एनआरसी के कारण आत्महत्या मामला

Fri, 19 Jul 2019 02:14 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शशि थरूर - फोटो : ANI
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कर्नाटक में जारी राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कांग्रेस और सहयोगी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को लोकसभा में हंगामा किया और सत्तारूढ़ भाजपा पर चुनी हुई सरकारों को गिराने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया। सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के सदस्यों ने कर्नाटक के विषय पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। कांग्रेस एवं द्रमुक के सदस्यों ने आसन के निकट पहुंचकर नारेबाजी की। वही शशि थरूर ने एनआरसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 57 लोगों ने आत्महत्या कर ली है क्योंकि उनका नाम सूची में शामिल नहीं था।

लोकसभा में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 संशोधन विधेयक पेश

लोकसभा में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 संशोधन विधेयकपर चर्चा शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि हम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग को अधिक प्रतिनिधित्व वाला और शक्तिशाली बनाएंगे। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 संशोधन विधेयक मानवाधिकारों को अधिक प्रभावी ढंग से संरक्षित करने में मदद करेगा।

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संशोधन राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार निकायों के अध्यक्षों के कार्यकाल को वर्तमान पांच वर्षों से घटाकर तीन वर्ष कर देता है। यह भी निर्धारित करता है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के अलावा (वर्तमान आवश्यकता) उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश भी मानवाधिकार अध्यक्ष बन सकते हैं। इसी तरह उच्च न्यायालय के पूर्व जज राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं। राय ने कहा कि यह विधेयक इन निकायों को और अधिक प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां देता है।

एनआरसी के कारण 57 ने की आत्महत्या

लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नेशनल सिटिजन रजिस्टर पर कहा, 'एनआरसी के कारण असम में 57 लोग आत्महत्या कर चुके हैं क्योंकि उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। विडंबना यह है कि इनमें से अधिकांश लोग हिंदू हैं। जब हार्वर्ड लॉ स्कूल मानवाधिकार वकील सुधा भारद्वाज को सम्मानित कर रहा था, तो हमारी सरकार उसे गिरफ्तार करने में व्यस्त थी। सरकार ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को देश से भागने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया।'

सदन में पश्चिम बंगाल की मार्केटिंग मत करिए

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की एक टिप्पणी के जवाब में पश्चिम बंगाल सरकार की एक योजना का उल्लेख किया तो स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ‘आप सदन में राज्य की मार्केटिंग मत करिए।’ दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में हर्षवर्धन ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने पहले आयुष्मान भारत योजना को लागू किया था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभालने के बाद उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की है। इस योजना को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। बाद में बंदोपाध्याय ने कहा कि मंत्री जी पार्टी के दबाव में राजनीतिक बयान दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल की सरकार ने पहले ही स्वास्थ्य बीमा योजना चल रही है जिसके तहत पांच लाख रुपये का कवर मिलता है।

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कांग्रेस का भाजपा पर सरकार गिराने का आरोप

हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा ‘सदन के सदस्यों ने ही सहमति बनाई है कि राज्यों के विषय यहां नहीं उठने चाहिए और यह (कर्नाटक का मामला) राज्य का विषय है, लेकिन मैं कांग्रेस के नेता को शून्यकाल में कर्नाटक के विषय पर अपनी रखने का मौका दूंगा।’ 

शून्यकाल में कर्नाटक का मुद्दा उठाते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा विभिन्न राज्यों में विरोधी दलों की चुनी हुई सरकारों को गिराने की साजिश रच रही है। राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

सत्ता एवं विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस, राकांपा और द्रमुक के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। सदन में बसपा के नेता कुंवर दानिश अली ने भी सत्तापक्ष पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया जिस पर भाजपा सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। बाद में अली भी सदन से वाकआउट कर गए।
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