पांचवें चरण का मतदान उत्तर प्रदेश में सियासी नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल यह वही क्षेत्र है जहां पर भारतीय जनता पार्टी की मजबूत बादशाह कायम है। पांचवे चरण में लखनऊ, रायबरेली, मोहनलालगंज, अमेठी, फैजाबाद, कैसरगंज, बाराबंकी और गोंडा समेत जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर और कौशांबी शामिल है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पांचवे चरण को हाई प्रोफाइल लोकसभा क्षेत्रों का चुनाव भी माना जाता है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक जानकार जटाशंकर सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश की रायबरेली, अमेठी और और प्रदेश की राजधानी लखनऊ का चुनाव हमेशा से चर्चा में रहता है। वह कहते हैं कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने 14 सीटों में से अमेठी और रायबरेली को छड़कर 12 सीटों पर कब्जा किया था। जबकि 2019 में अपना सियासी ग्राफ बढ़ाते हुए 13 सीटों पर मजबूत पकड़ बनाई। अवध प्रांत के भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष कमलेश मिश्रा कहते हैं कि इस बार भारतीय जनता पार्टी पांचवें चरण की सभी सीटों पर चुनाव जीतेगी। इसमें कांग्रेस की रायबरेली जैसी सीट भी भाजपा के खाते में आने वाली है।
केंद्रीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से पहले इन 14 सीटों में लखनऊ, रायबरेली, अमेठी और कैसरगंज में भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी लगातार जीतते रहे। वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि लखनऊ लोकसभा सीट पर बीते 25 साल से भारतीय जनता पार्टी ही काबिज है। 1991 से लेकर 2004 के लोकसभा चुनाव तक अटल बिहारी वाजपेयी यहां से सांसद रहे। उसके बाद भाजपा के लालजी टंडन और अब 2014 से भारतीय जनता पार्टी के राजनाथ सिंह सांसद हैं। इसी तरह रायबरेली में 2004 से कांग्रेस की सोनिया गांधी लगातार सांसद हैं। जबकि अमेठी में 1981 से लेकर 2019 तक 38 साल में महज एक साल के लिए कांग्रेस यहां से बाहर हुई। हालांकि 2019 में कांग्रेस के राहुल गांधी अपना चुनाव हारे। इसी तरह अवध क्षेत्र के ही कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र में 2014 से पहले समाजवादी पार्टी का परचम बुलंद था। 1996 से लेकर 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के बेनी प्रसाद वर्मा लगातार सांसद बने रहे।
सियासी जानकारों का कहना है कि 2014 से पहले इन 14 लोकसभा सीटों पर यहां की जनता ने अलग-अलग पार्टियों पर भरोसा किया। राजनीतिक जानकार बृजेंद्र शुक्ला बताते हैं कि अयोध्या (पहले फैजाबाद जिला) के नाम पर पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी ने जो माहौल बनाया है, वह उसे विजय के रूप में देख रही है। लेकिन सियासी नजरिए से फैजाबाद लोकसभा सीट पर सभी दलों के नेताओं को यहां की जनता ने आजमाया है। 1998 में समाजवादी पार्टी ने, 1999 में भारतीय जनता पार्टी, 2004 में बसपा 2009 में कांग्रेस को फैजाबाद की जनता ने जिताकर संसद में पहुंचाया था। अवध क्षेत्र की बाराबंकी लोकसभा सीट पर भी 1998 में भाजपा 1999 में सपा, 2004 में बसपा, 2009 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। गोंडा लोकसभा सीट पर 1998 में समाजवादी पार्टी, 1999 में भारतीय जनता पार्टी, 2004 में समाजवादी पार्टी और 2009 में कांग्रेस ने यहां से चुनाव जीता था। शुक्ला कहते हैं कि अवध की इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी जहां 2014 के बाद बनी अपनी बादशाहत को बरकरार रखना चाहती है। वहीं समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस अपने पुराने इतिहास को दोहराना चाह रही है।
राजनीतिक जानकार नसरुद्दीन कहते हैं कि अवध के साथ-साथ बुंदेलखंड इलाके में इतिहास और बादशाहत को बचाने की लड़ाई चल रही है। झांसी से 2014 भारतीय जनता पार्टी पार्टी की उमा भारती चुनाव जीती, 2019 में अनुराग भाजपा के सांसद हुए। जबकि इससे पहले 1998 में यहां से भाजपा जीती। 1999 में कांग्रेस ने यहां से चुनाव जीता। 2004 में सपा को और 2009 में फिर कांग्रेस ने संसद में झांसी की जनता का प्रतिनिधित्व किया। इसी तरह बुंदेलखंड की जालौन सीट पर भी बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा का परचम लहरा रहा है। जबकि 1998 में भाजपा, 1999 में बसपा, 2004 में भाजपा और 2009 में समाजवादी पार्टी यहां से चुनाव जीती। इसी तरह यहां के हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में दो चुनावों से भारतीय जनता पार्टी का सांसद है। जबकि इसी सीट पर 1991 से लेकर 1999 तक बहुजन समाज पार्टी का कब्जा था। फिर 2004 से लेकर 2009 के लोकसभा चुनाव तक समाजवादी पार्टी सांसद बना।
बुंदेलखंड की बांदा लोकसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का परचम लहरा रहा है। 2014 से पहले इस लोकसभा क्षेत्र में 1998 में भाजपा जीती थी। उसके बाद 1999 में बसपा 2004 से लेकर 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सांसद बने। फतेहपुर लोकसभा क्षेत्र में 1998 और 1999 में जीत दर्ज की थी। उसके बाद 2004 में जहां बसपा से सांसद बना, तो 2009 में समाजवादी पार्टी ने सीट पर अपना प्रत्याशी जिताया। 2014 से भाजपा की निरंजन ज्योति यहां से सांसद हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पांचवे चरण का चुनाव न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी बल्कि विपक्ष के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। राजनीतिक विश्लेषक नसीरुद्दीन कहते हैं कि 2014 से इन 14 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने मजबूत कब्जा जमाया है। इसीलिए भाजपा ने अपनी सीटों के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए इन सभी सीटों को दोबारा जीतने की रणनीति बनाई है। जबकि विपक्षी गठबंधन अपने पुराने इतिहास को दोहराने के लिए सभी दांव पेंच आजमा रहा है।