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LS Polls 2024: कोई चुनाव चिह्न में उलझा, तो कोई बदल रही मुंबई को बता रहा रोल मॉडल, यहां ये हैं अहम मुद्दे

आशीष तिवारी
Updated Wed, 15 May 2024 02:42 PM IST

सार

अमर उजाला डॉट कॉम ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मुंबई के अलग-अलग इलाकों में युवाओं से लेकर पटरी दुकानदार और टैक्सी चालकों से लेकर स्थानीय लोगों से बात की।
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Maharashtra, Mumbai, Ground Report - फोटो : Amar Ujala


मुंबई के दादर इलाके में सड़क किनारे खिलौने बेचने वाले मिलिंद कहते हैं कि शहर में लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स बताती हैं कि लोगों को मकान मिल रहे हैं। यह पूछने पर कि क्या उन्हें मकान मिला है, इस पर वे कहते हैं अभी नहीं, लेकिन शिवसेना उनको मकान देगी। कौन सी शिवसेना उनको मकान देगी, इस सवाल पर मिलिंद कहते हैं कि एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना। लेकिन बात जब चुनाव चिह्न की आई तो मिलिंद कंफ्यूज हो गए। वह उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के चुनाव चिन्ह को बदल कर बताते हैं। वह कहते हैं कि मुंबई में बदलाव और विकास तो हुआ है। अपनी रोजी-रोटी के बारे में कहते हैं, रोजाना तीन चार सौ रुपये तो कमा ही लेते हैं। लेकिन मिलिंद को चिंता इस बात की है कि विकास के साथ साथ अगर महंगाई को कुछ काबू कर लिया जाता, तो और बेहतर होता।


मुंबई में टैक्सी चलाने वाले दीपक कहते हैं कि बीते 20 साल से वह यहीं पर काम करते हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में जिस तरीके से मुंबई की सड़कों पर जाम की अवस्था से निजात मिली है, वह एक बेहतर कदम है। उनका कहना है कि यहां की सड़कों का जो नया जाल बिछाया गया है, वह मुंबई को और गति दे रहा है। फ्लाईओवर से लेकर टनल बनाईं जा रहीं हैं। वह कहते हैं कि हाजी अली से लेकर नरीमन पॉइंट तक जाने में पहले घंटों जाम में जूझना पड़ता था। अब बनाई गई नई टनल से यह रास्ता महज चंद मिनट का रह गया है। इसके अलावा कोस्टल रीजन में बनने वाली सड़कों और फ्लाई ओवर का जिस तरीके से निर्माण किया जा रहा है, वह मुंबई के लिए बहुत बेहतर है।


दीपक के साथ ही टैक्सी चलाने वाले विशाल कहते हैं कि वह मुंबई के ही रहने वाले हैं। अब शहर में क्या बेहतर हो रहा है उस पर तो वह कुछ नहीं कह सकते। लेकिन लगातार बढ़ रही महंगाई पर विशाल परेशान हो जाते हैं। उनका कहना है महंगाई बहुत है। राज किसी का भी हो, लेकिन इस पर कोई कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। उनका कहना है कि ट्रैफिक लाइन पर कई बार छोटी-छोटी गलती पर हवलदार डेढ़ हजार से लेकर दो हजार रुपये तक लेते हैं। ऐसे में वह क्या खुद खाएंगे क्या अपने परिवार को खिलाएंगे और क्या बचत करके अपने मालिक को देंगे। वह कहते हैं कि चुनाव आता है, तो महंगाई के मुद्दे उठाते हैं, लेकिन उस पर हकीकत में कोई काम नहीं होता है। दीपक कहते हैं कि जब चुनाव आता है तभी नेता उनसे मिलने आते हैं। बाकी वक्त न तो वह नेताओं से मिल पाते हैं और न ही अपने इन मुद्दों के बारे में किसी से बात कर पाते हैं। हालांकि उनका कहना है जब चुनाव होता है, तो इन मुद्दों के आधार पर ही लोगों को वोट देना चाहिए।


मुंबई के सिद्धविनायक मंदिर के ट्रस्टी सुनील गिरी कहते हैं कि यह तो देश का चुनाव है। इसलिए मुद्दे भी राष्ट्रीय स्तर के हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर सड़कों के चौड़ीकरण से लेकर लगने वाली जाम को कम कराने को लेकर सुनील का कहना है कि स्थानीय सांसद ने इस इलाके में काफी काम किया है। क्योंकि यह इलाका प्रभादेवी का वह क्षेत्र है जहां पर विश्व प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर है। इसलिए यहां पर स्थानीय सांसद की प्राथमिकता में सड़कों के चौड़ीकरण से लेकर यातायात को सुगम करना शामिल है। क्योंकि इस इलाके में महानगरपालिका भी उसी तरह से काम करती है, जिस तरीके से स्थानीय सांसद काम करते हैं। यही वजह है कि इलाके में आपको स्थानीय समस्याएं मुंबई के अन्य दूसरे हिस्सों की तुलना में कम मिलेंगी। मुंबई के इलाके से उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के आमने-सामने होने पर सुनील कहते हैं कि देश का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में भरोसा करता है और उनके भरोसे पर ही वह विकास को देख रहा है। इसलिए एक पार्टी के दो में तब्दील होने का कोई असर यहां पर नहीं दिखेगा। 


इलाके के ही रहने वाले अमित जयसवाल कहते हैं कि मुंबई में मुद्दे तो सिर्फ विकास के ही हैं और इस विकास के आधार पर लोग वोट करने वाले हैं। अमित कहते हैं मुंबई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन के साथ जिस तरह से मेट्रो स्पीड पकड़ती जा रही है वह मुंबई को एक नई दिशा दे रही है। इसी तरह मुंबई में बन रहा सड़कों, टनल और फ्लाई ओवर का जाल एक अलग तरह से शहर को दिशा दे रहा है। इसलिए यह चुनाव महाराष्ट्र और मुंबई में डेवलपमेंट के नाम पर ही हो रहा है। उनके साथ खड़े विकास झा कहते हैं कि महाराष्ट्र में महायुती ने जिस तरीके से काम किया है, वह दिख रहा है। उन्होंने कहा आपने महाराष्ट्र के कई इलाकों का दौरा किया है। क्या आपको महाराष्ट्र में सड़कों का बेहतर नेटवर्क नहीं दिखा। विकास कहते हैं कि मुंबई में बना अटल सेतु मुंबई की पूरी लाइफ को बदलने जा रहा है। मुंबई की कोस्टल रोड बनने से सुबह और शाम का पूरा ट्रैफिक खत्म हो गया है। 
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