लोकसभा ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के हंगामे के बीच बिना किसी बहस के साल 2023-24 के लिए विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों और इनसे संबंधित विनियोग विधेयकों को मंजूरी दे दी। वहीं, संसद के दोनों सदनों में लगातार आठवें दिन पक्ष-विपक्ष के हंगामे के कारण सामान्य तरीके से काम-काज नहीं हुआ। लोकसभा की कार्यवाही बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे आरंभ होने पर पिछले सात कार्यदिवसों की तरह लंदन में राहुल के बयान और अदाणी-हिंडनबर्ग मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष का हंगामा आरंभ हो गया। इसके कारण कार्रवाई पहले दो बजे और फिर शाम 6 बजे तक के लिए स्थगित की गई।
शाम छह बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर बिरला ने सबसे पहले अनुदान मांगों में विपक्षी सदस्यों की ओर से पेश कटौती प्रस्तावों को मतदान के लिए रखा। इन्हें सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 45 लाख करोड़ रुपये के बजटीय खर्च की अनुदान मांगों और उनसे जुड़े विनियोग विधेयकों को चर्चा और मतदान के लिए पेश किया। बिरला ने सभी मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर एक साथ मतदान करवाया। इन्हें भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई। यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ 12 मिनट में निबट गई। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद रहे।
अनुदान मांगें बजट का अहम हिस्सा होती हैं। पहले के मुकाबले लोकसभा में इस बार हंगामे के कारण तय मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं हुई। लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने रेल, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, आदिवासी मामले, पर्यटन और संस्कृति मंत्रालयों के अनुदान मांगों पर बहस की अनुमति दी थी।
बजट का अनुमानित खर्च 45 लाख करोड़ के पार
सदन में पेश किए गए बजट दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2023-24 में सरकार का अनुमानित खर्च 45,03,097 करोड़ रुपये है। इनमें से पूंजीगत खर्च 10,00,961 करोड़ रूपये है। 31 मार्च 2023 तक सरकार का बजट खर्च 41,87,232 करोड़ रुपये है जो 2021-22 के खर्च से 3,93,431 करोड़ रुपये अधिक है।
राज्यसभा को नहीं है संशोधन का अधिकार
बजट से संबंधित सभी विधेयकों को लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा भेजा जाएगा। हालांकि, ऊपरी सदन को इसमें किसी तरह के बदलाव का अधिकार नहीं है। बजट से संबंधित सभी विधेयक मनी बिल होते हैं जिनके पारित होने के लिए सिर्फ लोकसभा की मंजूरी जरूरी होती है।
गतिरोध के बीच जल्द खत्म हो सकता है सत्र
बजट से संबंधित कर प्रस्तावों वाले वित्त विधेयक को सरकार अब शुक्रवार को मतदान के लिए रख सकती है। अगर शुक्रवार को यह लोकसभा से पारित हो जाता है, तो सरकार बजट सत्र को समय से पहले खत्म करने का फैसला ले सकती है, क्योंकि लगातार जारी गतिरोध के साथ 6 अप्रैल की तय तारीख तक सदन का चलना मुश्किल लग रहा है।