राजनीतिक दलों के बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव 2024 बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। दक्षिण भारत में जनाधार मजबूर रखने वाले पलानीस्वामी ने कहा है कि वोट मांगने के लिए प्रधानमंत्री को चेहरा बनाने की जरूरत नहीं है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में AIADMK और उनके सहयोगियों के लिए वोट मांगने के लिए किसी प्रधानमंत्री उम्मीदवार को पेश करने की जरूरत नहीं है।
पलानीस्वामी ने सवाल किया कि पिछले संसदीय चुनावों में क्या ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी ने वोट मांगने के लिए प्रधानमंत्री का चेहरा पेश किया था? दोनों ने ऐसा नहीं किया। इसी तरह, केरल में भी वाम मोर्चे ने प्रधानमंत्री पद का कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया था।
मंदिरों के शहर मदुरै में एसडीपीआई की 'वेलट्टम माथासरबिनमई' (धर्मनिरपेक्षता की जीत) रैली में पलानीस्वामी ने कहा, एकमात्र जरूरत 'अच्छा करने' की है। लोगों की सेवा करने और उनके हितों की रक्षा जरूरी है। अन्नाद्रमुक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए संसद में होने वाले प्रयासों को पूरा समर्थन देगी।
बता दें कि अन्नाद्रमुक अल्पसंख्यकों के हितों की अग्रणी पैरोकार रही है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता पलानीस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी ने सत्तारूढ़ द्रमुक की तरह नाटक नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक ने तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए कावेरी मुद्दे पर संसद की कार्यवाही को रोक दिया।
पलानीस्वामी के मुताबिक, डीएमके ने सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद मेडिकल इंट्रेंस परीक्षा- NEET को रद्द करने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद एमके स्टालिन ने आज तक अपना वादा पूरा नहीं किया है।
उन्होंने स्टालिन के इस आरोप को खारिज कर दिया कि 'अन्नाद्रमुक बीजेपी की गुलाम है।' पलानीस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र है और उसने कभी किसी भी दल को गुलाम बनाने की इजाजत नहीं दी। उन्होंने कहा कि जो भी पार्टी एआईएडीएमके के साथ जुड़ेगी, वह आगे बढ़ेगी। 'डीएमके' के साथ आने वाली पार्टियों को झटका लगने वाला है।
अन्नाद्रमुक प्रमुख ने कहा कि द्रमुक के सहयोगी स्टालिन के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने मुखर होकर कोई मुद्दा नहीं उठा सकते। दूसरी तरफ 'अन्नाद्रमुक जाति और धर्म से परे है।' यहां एक साधारण कार्यकर्ता भी शीर्ष पदों पर जा सकता है। अतीत में उनकी पार्टी भाजपा के साथ चुनावी गठबंधन के लिए 'तत्कालीन परिस्थितियों' के कारण विचार कर रही थी। हालांकि, पार्टी ने कभी भी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया।
पलानीस्वामी ने दोहराया कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भी अन्नाद्रमुक का भाजपा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अन्नाद्रमुक चीफ ने कहा कि उनकी पार्टी के भाजपा से नाता तोड़ने के बाद भी स्टालिन ने गुप्त गठबंधन जैसे बेबुनियाद आरोप लगाए, जिससे उनकी हताशा साफ दिखाई देती है।