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छोटे दलों का बड़ा डर, वोटरों ने राष्ट्रीय सोच को दी अहमियत तो उन्हें हो सकता है नुकसान

Wed, 27 Mar 2019 08:06 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा , नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार में श्रम एवं रोजगार मंत्री गोपाल राय (फाइल)
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माना जाता है कि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में वोटरों की प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। विधानसभा चुनाव में लोग राज्य के समीकरणों और विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वोट देते हैं, जबकि लोकसभा चुनाव में वे किसी दल की देश के प्रति नीतियों और दल का नेतृत्व कर रहे नेता की शख्सियत को ध्यान में रखकर वोटिंग करते हैं। ऐसे में उन दलों, जिनकी भूमिका केंद्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत सीमित है, उन्हें अभी से यह डर सता रहा है कि अगर चुनाव केंद्रीय मुद्दों पर होते हैं तो उनके मतदाता राष्ट्रीय पार्टियों की ओर झुक सकते हैं, और ऐसी परिस्थिति में उनका नुकसान हो सकता है। 
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इस बार भी कुछ राजनीतिक दलों को अभी से यह डर सताने लगा है कि इस लोकसभा चुनाव में भी मतदाता राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर वोटिंग कर सकते हैं। ऐसे में उनका क्षेत्रीय हित पीछे रह सकता है और चुनाव में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। शायद यही कारण है कि आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश के संयोजक गोपाल राय अपनी सभाओं में मतदाताओं को इसके प्रति 'आगाह' कर रहे हैं। 

मंगलवार को पूर्वी दिल्ली से आप प्रत्याशी आतिशी मार्लिना का प्रचार करते हुए मंडावली क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गोपाल राय ने कहा कि वे (मतदाता) वोट देते समय यह न सोचें कि राष्ट्रीय चुनाव में उन्हें किसी दूसरी पार्टी (भाजपा की तरफ इशारा करते हुए) को वोट देना है।
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जब दिल्ली विधानसभा का चुनाव आएगा तब वे अरविंद केजरीवाल को वोट देंगे क्योंकि दिल्ली के लिए अरविंद केजरीवाल बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली वालों के लिए हर चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना होना चाहिए। 

समाजवादी पार्टी (सपा) के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि हमारा भी अनुमान है कि पिछले लोकसभा चुनाव में कई वर्ग के वोटर जो किसी दल विशेष का समर्थन करते थे, उन्होंने नरेंद्र मोदी को देश के लिए बेहतर मानते हुए अलग लाइन पर जाकर वोट दिया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार परिस्थितियां बिलकुल अलग हैं और नरेंद्र मोदी उस वर्ग की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे हैं जिसने लाइन तोड़कर उनका समर्थन किया था। ऐसे में सपा नेता को नहीं लगता कि इस चुनाव में लोग पिछली बार की तरह मोदी को वोट देंगे।

वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा कहते हैं कि जाति के आधार पर हमेशा राजनीति करने वाले लोगों को अब यह समझ लेना चाहिए कि जनता राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हित के बीच के फर्क को समझती है। उसे अपने देश की प्राथमिकताएं पता हैं।

जनता की जागरूकता से जाति और धर्म की राजनीति करने वाले दलों के अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि जनता इस बार राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता से वाकिफ है और वह उन्हें इस बार पिछली बार से भी अधिक बहुमत से जिताएगी। 
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