कितने वर्षों बाद कांग्रेस ने यहां अपने अध्यक्ष को बुलाने का जोखिम उठाया था और गजब का जन सैलाब उमड़ आया। 23 मार्च को पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में भी राहुल गांधी को सुनने काफी लोग आए थे। पश्चिम बंगाल के मालदा में भी राहुल गांधी की रैली थी। बताते हैं लोगों में गजब का उत्साह था। जिधर देखिए लोग खुद चले आ रहे हैं। राहुल गांधी का आकर्षण बढ़ रहा है। अधीर रंजन चौधरी, शक्ति सिंह गोहिल समेत तमाम नेता जनता के बीच में राहुल गांधी के बढ़ रहे आकर्षण से गदगद हैं।
क्या यह बदलाव का संकेत है?
कभी संघ परिवार के चिंतकों में गिने जाने वाले सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष बहुत सधी हुई राजनीति कर रहे हैं। पहले उनके बारे में ऐसा सोचना थोड़ा मुश्किल था। अब राहुल गांधी शरद पवार, सीताराम येचुरी, चंद्रबाबू नायडू, शरद यादव के साथ बैठकर पार्टी हित के निर्णय ले रहे हैं। वह कांग्रेस को भविष्य की बड़ी और सशक्त रोड-मैप तैयार करने में लगे हैं।
कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति जनता के प्रचंड आकर्षण के आगे 2017 तक वह अचानक इतने बड़े बदलाव के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। बताते हैं इसी सोच के आधार पर उन्होंने कई बार पार्टी फोरम में भी उत्साह नहीं दिखाया था। लेकिन अब उन्हें सब दिखाई दे रहा है। अब प्रधानमंत्री मोदी अपनी जनसभा में रक्षात्मक स्ट्रोक खेल रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष आक्रामक।
सूत्र का कहना है कि राजनीति में ऐसा दो सूरत में होता है। पहला सत्ता पक्ष के नेता से लोगों की अपेक्षा को धक्का लगना और दूसरा विरोधी नेता की सूझबूझ। निश्चित रूप से राजनीति में कुछ ऐसा हो रहा है।