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फेसबुक ने बनाया इलेक्शन वॉर रूम, फर्जी खबरों-नफरत भरे संदेशों पर नजर रख रहे ‘सूचना योद्धा’

Mon, 08 Apr 2019 10:23 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतदान होने से कुछ दिन पहले फेसबुक इंडिया के प्रबंध संचालक और उपाध्यक्ष अजित मोहन ने एक ब्लॉग लिखकर बताया है कि फेसबुक किस तरह से अपनी तैयारी को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने अपने ब्लॉग में कहा कि फेसबुक नागरिक विमर्श और बहस के लिए अहम रोल अदा करती है। इसलिए फेसबुक पर अभद्र भाषाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है, खासकर चुनाव के समय को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया जा रहा है। 

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फेसबुक ने अपने मुख्यालय में एक व्यापक रणनीति शुरू की है जिसमें इलेक्शन वार रूम में ‘सूचना योद्धा’ फर्जी खबरें, मतदाता को दबाने का प्रयास, संदिग्ध खाता व्यवहार, नफरत भरे संदेश और फर्जी खातों जैसी घटनाओं पर नजर रख रहे हैं। अजित मोहन ने बताया कि इस मंच ने भारत में मान्यता प्राप्त सात संगठनों के साथ तथ्यों की जांच के लिए साझेदारी की है। मोहन ने ब्लॉगपोस्ट में कहा कि ये समूह बहुतायत में बोली जाने वाली आठ भाषाओं-अंग्रेजी, हिन्दी,बंगाली,मराठी,तेलुगू,तमिल,मलयालम और गुजराती भाषाओं को कवर करते हैं और अन्य को शामिल करने पर विचार कर रहा है। 

18 महीनों से चल रही तैयारी
भारतीय 17वीं लोकसभा चुनाव में वोट डालने के लिए तैयार हैं। फेसबुक और हमारी सहयोगी ऐप निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते देखना चाहती है। इसलिए हमने 18 महीने पहले से ही इसपर काम करना शुरू कर दिया था। इस दौरान फर्जी अकाउंट को खोजना शुरू किया, साथ ही उनको ब्लॉक भी किया। गलत संदेश फैलाने वालों से लड़ रहे हैं और फर्जी मुहिम चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है। 
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ज्यादा पादर्शिता, ज्यादा संसाधन
हम लोगों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोडक्ट लॉन्च किया है। ये सेवा लोगों को जानने में सहायता करती है कि जो विज्ञापन चल रहे हैं उन्हें कौन भेज रहा है। साथ अगर किसी व्यक्ति को फेसबुक पर कोई विज्ञापन चलाना है तो उन्हें अपनी पहचान की पुष्टि करनी होगी। 

गलत सूचना से लड़ाई जारी
हाल के महीनों में हमने तथ्यों की जांच के लिए तीसरी पार्टियों तक अपना दायरा बढ़ाया है। ये पार्टियां भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा इंग्लिश, हिंदी, मलयालम, बंगाली, मराठी, तेलुगू, गुजराती तक पहुंच रखती है। इससे जो क्षेत्रीय भाषा में कंटेंट भेजा जाता है उसको रोकने का प्रयास किया जा रहा है। 

चुनाव आयोग के साथ मिलकर काम
चुनाव की अखंडता को कायम रखना सिर्फ फेसबुक के अकेले का काम नहीं है। हम चुनाव आयोग और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर इसपर काम कर रहे हैं। हम नीति निर्धारक, उम्मीदवारों और कर्मियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं क्योंकि चुनावों के वक्त सबसे ज्यादा खतरा इनके अकाउंट को लेकर ही होता है। 

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